बुधवार, 12 जनवरी 2022

६३३. हमसफ़र



मैं निकला था मंज़िल की ओर,

तुम भी उसी ट्रेन में चढ़ी,

डिब्बा वही था, बर्थ भी वही,

हम साथ-साथ बैठे रहे,

ट्रेन भी चलती रही,

हमसफ़र बन गए हम दोनों. 


मैंने कहा, मैं वहीं उतर जाऊंगा,

जहाँ तुम्हें उतरना है,

तुम भी ख़ुश थी मेरे फ़ैसले से. 


अचानक ऐसा क्या हुआ 

कि तुम्हारी कोई मंज़िल ही नहीं रही,

अब तुम तैयार हो 

किसी भी उस जगह उतरने को,

जहाँ मुझे नहीं उतरना है. 


साथ-साथ बैठे-बैठे 

अचानक ऐसा क्या हो जाता है 

कि एक ही जगह उतरनेवाले 

अपना स्टेशन बदल लेते हैं. 

 

6 टिप्‍पणियां:

  1. असल में मंज़िल किसी को नहीं पता । बस अचानक ज़िन्दगी की गाड़ी उतार देती है और गंतव्य आ जाता है । हमसफर में से एक का सफर पहले पूरा हो जाता है ।।

    जवाब देंहटाएं
  2. हृदयस्पर्शी भाव लिए सुन्दर सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
  3. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (14-01-2022 ) को 'सुधरेगा परिवेश अब, सबको यह विश्वास' (चर्चा अंक 4309) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

    जवाब देंहटाएं
  4. साथ-साथ बैठे-बैठे
    अचानक ऐसा क्या हो जाता है
    कि एक ही जगह उतरनेवाले
    अपना स्टेशन बदल लेते हैं.
    खूबसूरत अभिव्यक्ति!
    अक्सर ऐसा ही होता है जिनकी राहें, मंजिल एक होती है वह कब अलग हो जाती है पता ही नहीं चलता और कारण ढूढ़ते ढूढ़ते जिंदगी भी गुजर जाती है पर कारण कभी पता नहीं चलता!

    जवाब देंहटाएं
  5. हर कोई अकेला ही आया है और अकेला ही जाने वाला है, दो घड़ी का साथ मिल जाता है और राह थोड़ी आसान हो जाती है

    जवाब देंहटाएं
  6. शायद हमसफर जीवन के सफर में मिलने वाले एक साथी का नाम है जिसके सफर का आनन्द ही आनन्द साथ रहता है तो जिसको खोकर जीवन का सफर सफर नहीं एक नीरस यात्रा मात्र रह जाती होगी।

    जवाब देंहटाएं