शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

३७९. चींटियाँ

Red Ant, Ant, Macro, Insect, Ant, Ant

चींटियाँ कहीं भी,
किसी के भी 
पांवों तले दब जाती हैं,
इतनी छोटी होती हैं वे 
कि दिखाई ही नहीं पड़तीं.

वे आगाह भी करती हैं ,
तो किसी को पता नहीं चलता,
उनकी चीख़ें नहीं पहुँचती 
कुचलनेवालों के कानों तक.

किसी को फ़र्क नहीं पड़ता 
चींटियों के मर जाने से,
पर चींटियों का जन्म हुआ है,
तो उन्हें जीने का हक़ है,
जीने के लिए लड़ने का हक़ है.  

अगर चींटियों को जीना है,
तो उन्हें बनाना होगा अलग रास्ता,
ऊंची करनी होगी आवाज़
और काट खाना होगा उन पांवों को,
जिनके नीचे दबकर वे दम तोड़ देती हैं.

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 07 सितंबर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (08-09-2019) को " महत्व प्रयास का भी है" (चर्चा अंक- 3452) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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  3. बहुत सुंदर! हर प्राणी को जीने का हक है।

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  4. बहुत सुंदर कविता.
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.
    iwillrocknow.com

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  5. वाह! जीने के अधिकार के लिए चीखती रचना !

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  6. सच है ... पर बड़े लोग ऐसा कहाँ होने देते हैं ...

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  7. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे Best Whatsapp status 2020 (आप सभी के लिए बेहतरीन शायरी और Whatsapp स्टेटस संग्रह) Janvi Pathak

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