शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

३४७.यमराज से विनती

यमराज,
इतनी जल्दी आ गए!
अभी तो लिखनी हैं मुझे 
बहुत सारी कविताएं,
इंतज़ार में हैं मेरे पाठक,
उनका दिल मत दुखाओ।

चलो, थोड़ी मोहलत ही दे दो,
घूम आओ ज़रा कॉलोनी में,
मेरे बाद जिसकी बारी है,
उसे पहले उठा लो,
उसे कौन सी कविता लिखनी है?

यह भी संभव नहीं,
तो बैठ जाओ सोफ़े पर,
सुस्ता लो थोड़ा,
कहो तो चाय भिजवा दूँ 
एक कप तुम्हारे लिए.

वह कविता तो पूरी कर लूँ ,
जो कल रात शुरू की थी,
सच कहता हूँ यमराज,
अगर अधूरी रह गई वह कविता,
तो मैं चैन से मर नहीं सकूंगा। 



8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (24-02-2019) को "समय-समय का फेर" (चर्चा अंक-3257) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत खूब..... अच्छे लोगोके लिए तो यमराज को भी इंतज़ार करना ही चाहिए ,सादर नमस्कार

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  3. ओह ..कुछ न कुछ तो रह जाएगा !

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  4. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे Best Whatsapp status 2020 (आप सभी के लिए बेहतरीन शायरी और Whatsapp स्टेटस संग्रह) Janvi Pathak

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