जो मैं समझता हूँ कि मैं हूँ,
दरअसल मैं वह नहीं हूँ.
मैं वह भी नहीं हूँ,
जो तुम समझते हो
कि मैं हूँ.
न तुम जानते हो,
न मैं
कि मैं क्या हूँ.
मेरा मैं
अनगिनत परतों के नीचे
कहीं दबा पड़ा है,
जिन्हें हटाकर देखना
नामुमकिन सा लगता है.
फिर भी कभी
मुझे पता चल गया
कि मैं क्या हूँ,
तो तुम्हें बता दूंगा,
तुम्हें भी अगर
भनक लग जाय
तो मुझे बता देना.
दरअसल मैं वह नहीं हूँ.
मैं वह भी नहीं हूँ,
जो तुम समझते हो
कि मैं हूँ.
न तुम जानते हो,
न मैं
कि मैं क्या हूँ.
मेरा मैं
अनगिनत परतों के नीचे
कहीं दबा पड़ा है,
जिन्हें हटाकर देखना
नामुमकिन सा लगता है.
फिर भी कभी
मुझे पता चल गया
कि मैं क्या हूँ,
तो तुम्हें बता दूंगा,
तुम्हें भी अगर
भनक लग जाय
तो मुझे बता देना.


