चलो, तुमसे कह ही देता हूँ
कि मैं तुमसे नफ़रत करता हूँ,
जैसे कभी साफ़-साफ़ कहा था
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ,
पर तुम परेशान मत होना,
सिर्फ़ कह देने से कुछ नहीं होता,
हो सकता है, कल मुझे लगे,
मैं फिर से तुम्हें कह दूं
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ.
दरअसल हम अकसर वही कहते हैं
जो हमारे मन में होता है
और जो मन में होता है,
हमेशा एक-सा कहाँ होता है?
कभी-कभी तो ऐसा भी होता है
कि ज़बान जो कहती है
या उसे जो कहना पड़ता है,
वह उससे बहुत अलग होता है
जो हमारे मन में होता है.
हो सकता है, जब मैंने तुमसे कहा था
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ,
तो मेरे मन में तुम्हारे लिए नफ़रत हो
और आज जब मैं कह रहा हूँ
कि मैं तुमसे नफ़रत करता हूँ,
तो मेरे मन में तुम्हारे लिए
बेपनाह प्यार भरा हो.
कि मैं तुमसे नफ़रत करता हूँ,
जैसे कभी साफ़-साफ़ कहा था
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ,
पर तुम परेशान मत होना,
सिर्फ़ कह देने से कुछ नहीं होता,
हो सकता है, कल मुझे लगे,
मैं फिर से तुम्हें कह दूं
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ.
दरअसल हम अकसर वही कहते हैं
जो हमारे मन में होता है
और जो मन में होता है,
हमेशा एक-सा कहाँ होता है?
कभी-कभी तो ऐसा भी होता है
कि ज़बान जो कहती है
या उसे जो कहना पड़ता है,
वह उससे बहुत अलग होता है
जो हमारे मन में होता है.
हो सकता है, जब मैंने तुमसे कहा था
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ,
तो मेरे मन में तुम्हारे लिए नफ़रत हो
और आज जब मैं कह रहा हूँ
कि मैं तुमसे नफ़रत करता हूँ,
तो मेरे मन में तुम्हारे लिए
बेपनाह प्यार भरा हो.
