top hindi blogs

रविवार, 7 जुलाई 2013

८८. नफ़रत और प्यार

चलो, तुमसे कह ही देता हूँ 
कि मैं तुमसे नफ़रत करता हूँ,
जैसे कभी साफ़-साफ़ कहा था 
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ,
पर तुम परेशान मत होना,
सिर्फ़ कह देने से कुछ नहीं होता,
हो सकता है, कल मुझे लगे,
मैं फिर से तुम्हें कह दूं 
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ.

दरअसल हम अकसर वही कहते हैं 
जो हमारे मन में होता है
और जो मन में होता है,
हमेशा एक-सा कहाँ होता है?

कभी-कभी तो ऐसा भी होता है 
कि ज़बान जो कहती है 
या उसे जो कहना पड़ता है,
वह उससे बहुत अलग होता है
जो हमारे मन में होता है.

हो सकता है, जब मैंने तुमसे कहा था 
कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ,
तो मेरे मन में तुम्हारे लिए नफ़रत हो
और आज जब मैं कह रहा हूँ 
कि मैं तुमसे नफ़रत करता हूँ,
तो मेरे मन में तुम्हारे लिए 
बेपनाह प्यार भरा हो. 

शनिवार, 29 जून 2013

८७. दिल और ज़बान

बहुत अजीब लगता है,
जब कोई कहता है 
कि वह ज़बान का कड़वा,
पर दिल का बहुत साफ़ है.

क्या महत्व है इसका 
कि कोई दिल का कैसा है?
क्या मतलब हो सकता है किसी को 
किसी अजनबी के दिल से?
यह कड़वी ज़बान ही तो है,
जो सीधे दिल पर चोट करती है.

अच्छा तो यही है 
कि ज़बान मीठी हो,
जो तुरंत असर करे,
फ़ौरन खुशी पंहुचाए,
अंदर से कोई बुरा हो तो हो.

दिल का कोई कैसा भी हो,
जो न दिखता है,
न महसूस होता है,
वह कैसा भी हो,
क्या फ़र्क पड़ता है?





शनिवार, 22 जून 2013

८६. बारिश के बाद

कई दिनों की बारिश के बाद 
आज सुबह से धूप खिली है,
कलूटे बादल जा छुपे हैं कहीं,
आसमान ने थोड़ी सांस ली है.

पत्तियां सुखा रहीं हैं भीगे बदन,
पंखुड़ियों के चेहरों पर चमक छाई है,
पंछी निकल पड़े हैं घोंसलों से,
चूज़ों को भूख लग आई है.

खुल गए हैं हाट-बाज़ार, रास्ते,
बोझिल क़दमों में फिर जान आई है,
थोड़े दिन चुप रहना बारिश,
बड़ी मुश्किल से ज़िंदगी मुस्कराई है.

रविवार, 16 जून 2013

८५. झाड़ू और गृहिणी

बहुत सफाई-पसंद है गृहिणी,
रोज बुहारती है कूड़ा,
रोज लगाती है पोंछा,
छोड़ती नहीं घर का कोई कोना 
जहाँ छिप सके ज़रा-सी भी गन्दगी.

चम-चम करता है गृहिणी का घर,
न कोई दाग, न कोई धब्बा,
पर जो उसके जीवन में बिखरा है,
वह कूड़ा कम ही नहीं होता,
बढ़ता ही चला जाता है.

ढूंढ नहीं पाई गृहिणी कोई झाड़ू,
जो हटा दे इस कूड़े को,
या थोड़ा कम ही कर दे,
कम-से-कम बढ़ने न दे.

झाड़ू लगाती गृहिणी सोचती है,
क्यों न वह एक तिनका निकाले 
और उसकी आँखों में चुभो दे,
जिसने उसके जीवन में कूड़ा बिखेरा है,
पर गृहिणी रुक जाती है,
क्योंकि वह परमेश्वर है 
और परमेश्वर के बारे में 
ऐसा सोचना भी पाप है.

शनिवार, 8 जून 2013

८४. फल

उसे फल खाना पसंद है,
पर वही जिन्हें खाना आसान हो,
जिनके लिए न चम्मच चाहिए,न छूरी,
न ही जिनको खाने में हाथ गंदे होते हों.

उसे केले जैसे फल पसंद हैं
या फिर सेब,अंगूर जैसे,
संतरे,पपीते जैसे नहीं,
क्योंकि वह नफ़ासत-पसंद है.

जो फल वह खाना चाहता है,
उससे कोई प्रतिरोध उसे मंज़ूर नहीं,
वह कोई ज़द्दोज़हद नहीं चाहता,
वह बस पूरा समर्पण चाहता है.