मंगलवार, 30 जून 2020

४५२. मौत से

हज़ारों मील के सफ़र का 
एक बड़ा हिस्सा 
तय कर लिया है मैंने.

बदन थक कर चूर है,
पाँव छालों से भरे हैं,
पेट अकड़ रहा है भूख से,
पर अभी दूर है गाँव.

मैं चलता रहूँगा,
जब तक सांस चलेगी,
मौत, तुम्हें उसकी कसम,
जो तुम्हें सबसे प्रिय है,
मेरे गाँव पहुँचने से पहले 
मेरे पास मत आना.

शनिवार, 27 जून 2020

४५१. कोयल से

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कोयल, 
तुम किसी भी समय 
क्यों गाने लगती हो?
इस भरपूर उदासी में,
जब सब घरों में बंद हैं,
तुम्हारी ख़ुशी का राज़ क्या है?
ज़रा हमें भी बताओ,
हम भी भर लें 
अपनी ज़िन्दगी में 
थोड़ी-सी ख़ुशी,
हम भी गा लें
तुम्हारे साथ-साथ,
तुम्हारे जितना नहीं,
तो थोड़ा-सा ही सही.

मंगलवार, 23 जून 2020

४५०. मत लौटना

'रागदिल्ली' वेबसाइट पर प्रकाशित मेरी कविता: 

बेटे,
बहुत राह देखी तुम्हारी,
बहुत याद किया तुम्हें,
अब आओ, तो यहीं रहना....

शनिवार, 20 जून 2020

४४९. शहर से

Delhi, India, Landmark, Architecture

बड़ी उम्मीद से आया था 
मैं तुम्हारे पास कभी,
बहुत रोका था गाँव ने,
वहां के खेतों,बगीचों ने,
वहां के फूलों, पत्तों ने,
दूर तक पुकारता रहा था कोई,
पर मैं आ गया था अनसुना करके.

मेरे क़दमों में उत्साह था,
मेरी आँखों पर सपनों की पट्टी थी,
बड़ी अच्छी लग रही थी दूर से मुझे 
तुम्हारी चौंधियाती रौशनी.

पर तुमने सब कुछ लूट लिया,
दर-दर का भिखारी बना दिया,
छीन लिया मुझसे मेरा 
आत्म-विश्वास,आत्म-सम्मान.

कम-से-कम अब इतना तो करो
कि मुझे वापस गाँव जाने दो,
वादा है,इस बार गया, 
तो कभी तुम्हारा मुँह नहीं देखूँगा.

गुरुवार, 18 जून 2020

४४८.अपने गाँव से

मेरे गाँव,
मैं वापस लौट रहा हूँ.

सिर पर गठरी उठाए,
छालों भरे पाँवों से 
थके बदन को घसीटते 
मैं निकल पड़ा हूँ 
सैकड़ों मील की यात्रा पर.

गिरते-पड़ते, ठोकरें खाते 
लहूलुहान पांव लिए 
शायद पहुँच जाऊं तुम तक.

अगर पहुँच जाऊं,
तो दुत्कारना नहीं मुझे,
माफ़ कर देना वह पाप,
जो तुम्हें छोड़कर मैंने किया था. 

अगर पूरी न कर पाऊँ यात्रा,
तो भी स्वीकार कर लेना मुझे,
मुझे फूल बनकर खिलना है ,
ख़ुश्बू बनकर तुम्हारी 
हवाओं में बिखरना है .


सोमवार, 15 जून 2020

४४७. मंज़िल

Epidemic, Coronavirus, Lurking

न जाने कहाँ से चले आ रहे हैं 
इतने सारे थके-थके कदम,
भूखे पेट का बोझ लादे.
सामान का बोझ कम हो सकता है,
पर भूखे पेट का कैसे कम हो?

मीलों से चले आ रहे हैं ये कदम,
मीलों तक चलना है इन्हें,
उन्हीं घरों तक पहुँचना है,
जहाँ से निकले थे ये कभी,
उन्हीं गलियों तक पहुँचना है,
जो इन्होंने छोड़ी थीं कभी.

कोरोना ने समझाया है इन्हें
कि जिसे मंज़िल समझा था,
वह तो बस एक छलावा था,
मंज़िल तो इनकी वहीं थी,
जहाँ से ये कभी चले थे.



शुक्रवार, 12 जून 2020

४४६. पुरानी दुनिया

Coronavirus, Virus, Mask, Corona

सड़कें सूनी हैं,
पक्षी ख़ामोश हैं,
हवाएँ लौट रही हैं
बंद दरवाज़ों से टकराकर.

सूरज उगता है,
मारा-मारा फिरता है
सुबह से शाम तक,
फिर डूब जाता है.

मुँह पर पट्टी बंधी है,
पहले की तरह बोलना 
अब संभव नहीं,
किसी को गले लगाना 
ख़तरे से ख़ाली नहीं.

अब हर आदमी 
शक के घेरे में है,
अब हर चीज़ से 
डर लगता है.

कोरोना ने बदल दी है 
हम सब की दुनिया,
जी चाहता है लौट जाएँ
अब उसी पुरानी
बेतरतीब दुनिया में.

मंगलवार, 9 जून 2020

४४५. जाले

Cobweb, Dark, Smoke, Mystical

वह जो पहले अच्छा नहीं लगता था,
अब बहुत अच्छा लगता है,
वह जिसे देखना भी नहीं चाहता था,
अब उसे गले लगाना चाहता हूँ.

घर में रहकर सोचता रहा मैं 
कि क्यों अच्छा नहीं  लगता था वह,
क्यों नहीं करता था मन उसे देखने का,
पर वज़ह कोई मिली ही नहीं.

बहुत नुकसान किया लॉकडाउन ने,
पर हटा दिए उसने बहुत सारे जाले.

रविवार, 7 जून 2020

४४४. बदहवास युग

Scrabble, Words, Wood, Wooden, Lockdown

धडकनें बढ़ रही हैं,
मन परेशान है,
क्या शुरू होने वाला है 
पहले सा पागलपन,
भागना बेमतलब 
इधर से उधर?

क्या ख़ाली सड़कों से 
उड़ जाएंगी चिड़ियाँ,
क्या उनकी जगह ले लेंगे 
रेंगते वाहन, घिसटते पांव?

क्या यूँ ही उगेगा सूरज,
यूँ ही डूब जाएगा,
क्या यूँ ही खिलेंगे फूल 
और यूँ ही मुरझा जाएंगे?

क्या लौट जाएंगे हम फिर से 
उसी बदहवास युग में,
क्या कुछ भी नहीं सीखेंगे हम
लॉकडाउन के दिनों से?

शुक्रवार, 5 जून 2020

४४३.सेहत

मैं निकल पड़ा हूँ 
ख़ाली पेट,पैदल 
हज़ारों मील की यात्रा पर,
मुझे गाँव पहुँचना है.

मैंने सुना है 
कि चलना सेहत के लिए 
बहुत अच्छा है,
यह भी सुना है 
कि व्रत रखना 
पेट के लिए अच्छा है.

शायद इस यात्रा में 
मैं गाँव पहुँच जाऊँ,
मेरी सेहत भी सुधर जाए,
आप ही कहिए
मैं सही सोच रहा हूँ न?

बुधवार, 3 जून 2020

४४२. विचारों से

A, I, Ai, Anatomy

विचारों,
घुस आओ अन्दर,
मैं कब से इंतज़ार में हूँ,
इतनी फ़ुर्सत में हूँ 
कि तुम्हारा स्वागत कर सकूँ,
देख सकूँ कि तुममें से 
किसे बोया जा सकता है,
सींचा जा सकता है,
बनाया जा सकता है 
एक हरा-भरा दरख़्त.

विचारों,
हिचको मत,
अन्दर आ जाओ,
जो लक्ष्मण-रेखा मैंने 
घर के बाहर खींची है,
वह तुम्हारे लिए नहीं है. 

मंगलवार, 2 जून 2020

४४१.परिंदा

Hummingbird, Bird, Flight, Avian

एक परिंदा डरते-डरते 
मेरी खिड़की पर आया,
फिर उड़ गया,
अगले दिन फिर आया,
एक पैर खिड़की के अन्दर रखा,
फिर उड़ गया.

थोड़े दिनों में वह 
घर के अन्दर घुस आया,
आस-पास बैठने लगा,
साथ बैठकर खाना खाने लगा.

मैंने पूछा,'डर नहीं लगता तुम्हें?'
उसने कहा,'लगता है,पर क्या करें?
तुम लोग बाहर कम निकलते हो,
तुम्हारे बिना हमारा मन नहीं लगता.'

शुक्रवार, 29 मई 2020

४४०. प्रवासी

वह जो चला था 
कभी परदेस से 
अपने गाँव नहीं पहुंचा है,
रास्ते में ही कहीं फंसा है,
न आगे जा सकता है,
न पीछे लौट सकता है.

वह जो चला था 
कभी परदेस से 
बहुत परेशान है,
करे तो क्या करे,
उसकी जान उसके 
कंठ में अटकी है,
न आगे आ सकती है,
न पीछे लौट सकती है.

मंगलवार, 26 मई 2020

४३९. यात्रा

'रागदिल्ली' वेबसाइट पर प्रकाशित मेरी कविता: 
मुझे नहीं देखने
शहरों से गाँवों की ओर जाते
अंतहीन जत्थे,

रविवार, 24 मई 2020

४३८.ख़तरा

Call, At Home, Stay, Contact Lock

खिड़कियाँ बंद हैं,
दरवाज़े बंद हैं,
टहल रही है घर भर में 
वही बासी हवा.

सुबह से शाम तक 
वही दीवारें, वही छत,
मुश्किल है अब बंद रहना,
बाहर निकलने से बचना.

जी चाहता है, 
खुली हवा में सांस लें,
निकल चलें बाहर,
पर ख़तरा है,
जो अब भी खड़ा है,
लक्ष्मण-रेखा है,
जो अब भी खिंची है.

शुक्रवार, 22 मई 2020

४३७. मकान और घर

House, Front, Green, Door, Window

लॉकडाउन  में 
वह बाहर नहीं है,
न ही घर में है,
वह मकान में है,
ईंट,सीमेंट की 
दीवारों के साथ.

उसे अब अन्दर का 
लॉकडाउन तोड़ना है,
थोड़ा-सा अपनापन,
थोड़ा प्यार छिड़कना है,
उसे अपने मकान को 
घर बनाना है.

सोमवार, 18 मई 2020

४३६. चलो, सोचते हैं

Covid Doctor, Fight Corona, St

अपने-अपने घरों मेंक़ैद हैं सब,
चलो, सोचते हैं, बाहर के बारे में,
उस कामवाली बाई के बारे में,
जिसकी पगार काटने को तैयार रहते हैं,
उन दिहाड़ी मज़दूरों के बारे में,
जो रोज़ कमाते,रोज़ खाते हैं,
उन डॉक्टरों,नर्सों के बारे में,
जो जान पर खेलकर जान बचाते हैं.

महसूसने के लिए,
कुछ करने के लिए,
सड़कों पर निकलना,
हाथ मिलाना,
गले लगना,
बिल्कुल ज़रूरी नहीं है.

शनिवार, 16 मई 2020

४३५. तब और अब

Stay Home, Lockdown, Stay Safe

जब मिलने के अवसर बहुत थे,
हम कतराकर निकल जाते थे,
अब लॉकडाउन में घर पर हैं,
तो मिलने को तरसते हैं.
***
जब सड़कें भरी होती थीं,
हम खोजते थे शांति,
अब सब शांत है,
तो हमें चाहिए कोलाहल.
***
जब समय नहीं मिलता था,
हम तलाशते थे आराम,
अब समय ही समय है,
तो हम खोजते हैं काम.


बुधवार, 13 मई 2020

४३४. लॉकडाउन में

Road, Sunrise, Trees, Avenue, Yellow

आओ, बालकनी में चलें,
सूरज को उगते हुए देखें,
परिंदों को चहकते हुए सुनें,
पत्तियों को हिलते हुए देखें.

महसूस करें कि सुबह-सुबह 
हवा कितनी ताज़ा होती है,
फूल कितने सुन्दर लगते हैं,
तितलियाँ कैसे मचलती हैं.

लताएँ कसकर लिपट गई हैं 
ऊंचे पेड़ों के सीने से,
बादल घूम रहे हैं आकाश में 
इधर से उधर मस्ती में.

शाम को खिड़की पर खड़े होंगे,
डूबता हुआ सूरज देखेंगे,
महसूस करेंगे कि उगते सूरज से 
डूबता सूरज कितना अलग होता है.

आओ, देख लें अनदेखा,
सुन लें अनसुना,
न जाने फिर ऐसा अवसर 
कभी मिले न मिले.

सोमवार, 11 मई 2020

४३३. लॉकडाउन में साथ-साथ

Couple, Female, Love, Male, Man

लॉकडाउन में हैं,
साथ-साथ हैं,
मगर चुप हैं,
महसूस कर रहे हैं
रिश्तों की भीनी-सी आंच.

कुछ बोलेंगे,
तो कम हो सकती हैं  
ये नजदीकियाँ,
शब्दों के नीचे 
दब सकते हैं अहसास.

इतना बहुत है 
कि हम साथ-साथ हैं,
बोलना ज़रूरी नहीं है,
बोलने से कहीं 
बेअसर न हो जाय लॉकडाउन.

गुरुवार, 7 मई 2020

४३२. आने दो अन्दर

White, Window, Glass, Shield, Frame

खिड़कियाँ खोल दो,
सूरज को अन्दर आने दो,
स्वागत करो हवा के झोंकों का,
नए मौसम की फुहारों का.

गमलों में तुमने जो फूल लगाए थे,
उनकी ख़ुशबू अन्दर आना चाहती है,
पौधों की कुछ सूखी पत्तियां 
कब से देहरी पर  खड़ी हैं,
कुछ परिंदे बैठे हैं मुंडेर पर,
शीशे से टकरा रहे हैं उनके गीत.

मत रोको,
आ जाने दो सबको अन्दर,
लॉकडाउन के दिनों में ख़त्म कर दो 
कुछ गैर-ज़रूरी लॉकडाउन.

सोमवार, 4 मई 2020

४३१. लॉकडाउन में गौरैया

Sparrows, Two, Birds, Pair, Plumage

घर में अकेले हो,
तो आने दो गौरैया को अन्दर,
बना लेने दो घोंसला,
चिंचियाने दो उसे,
हो जाने दो ज़रा-सी गन्दगी.

बस थोड़ा सा सह लो,
फिर देखना,
अकेले नहीं रहोगे तुम,
उदासी नहीं घेरेगी तुम्हें,
लॉकडाउन तुम्हें अच्छा लगेगा.

गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

४३०.परिंदों से

'राग दिल्ली' में प्रकाशित मेरी कविता:

परिंदों!
मत इतराओ इतना
और भ्रम में मत रहना
कि यह दुनिया अब
हमेशा के लिए तुम्हारी हुई!

मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

४२९. लॉकडाउन

Lockdown, Stay At Home, Stay Home

वार्डरॉब उदास हैं,
पोशाकें परेशान हैं,
कोई नहीं ले रहा 
उनकी सुध,
कोई नहीं पूछ रहा 
आईने से
कि कौन सी ड्रेस 
फबेगी उस पर.

गहने बंद हैं 
पिटारियों में,
हसरत से देख रहे हैं 
गृहिणियों को,
मेकअप का सामान 
घुट रहा है 
डिबियों-बोतलों में.

बीमार कर रखा है 
सबको कोरोना ने,
सबको इंतज़ार है 
लॉकडाउन टूटने का.

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

४२८. लॉकडाउन में

Sunset, Tree, Dusk, Dawn, Red, Glow

अच्छा है,ख़ुद से मुलाक़ात हो जाती है,
चिड़ियों से बात हो जाती है,
फूलों के रंग देख लेते हैं,
सूरज का डूबना देख लेते हैं.

पर याद आते हैं लोगों के रेले,
हाट में लगे सब्जियों के ठेले,
एक दूजे से टकराकर निकलना,
खोमचों पर खाने के लिए मचलना.

अच्छा है, घरवालों के साथ रहते हैं,
बहुत कुछ कहते,बहुत कुछ सुनते हैं,
पर याद आता है,पार्टियों के लिए सजना
और घर की कॉल बेल का अचानक से बजना.

बुधवार, 22 अप्रैल 2020

४२७. चूहे

Mouse, Rodent, Rat, Mice, Pest, Mouse
एक चूहा बिल से निकला,
थोड़ी देर घर में घूमा,
फिर वापस बिल में घुस गया.
उसने दूसरे चूहों से कहा,
'अभी कुछ दिन बिल में रहो,
हमारे फ्लैट पर 
दूसरे चूहों ने कब्ज़ा कर लिया है,
इंतज़ार करो उनके जाने का,
जल्दी ही यह फ्लैट 
फिर से हमारा होगा.'

मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

४२६. पिंजरे में

'राग दिल्ली' में लॉकडाउन की स्थिति पर मेरी कविता  'पिंजरे में'   यहाँ पढ़ी जा सकती है.

https://www.raagdelhi.com/sparrow/

शनिवार, 18 अप्रैल 2020

४२५. घर में हो तो

Bridge, Wooden Bridge, Color, The Fog

अब जब घर में हो,
तो बनाओ कुछ नए पुल,
मरम्मत करो उन पुराने पुलों की,
जिनमें दरारें आ गई हैं,
जो टूटने की कगार पर हैं.
***
अब जब घर में हो,
तो ध्यान से देखना,
वे काम कैसे पूरे होते हैं,
जिनके बारे में तुम सोचते थे 
कि अपने आप हो जाते हैं.
***
अब जब घर में हो,
तो अपने अन्दर देखना,
तुम हैरान रह जाओगे,
जब वहां तुम्हारी मुलाकात 
एक अजनबी से होगी.

मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

४२४. सफ़ाई


House, Home, Icon, Symbol, Sign

चलो, आज घर में हैं,
तो थोड़ी सफ़ाई करते हैं.

तोड़ देते हैं
अहम के जाले,
बुहार देते हैं
ग़लतफ़हमियों की धूल,
डाल देते हैं मशीन में
रिश्तों की चादरें,
उतार देते हैं 
उन पर जमी  मैल.

शिकायतों का कचरा,
जो भरा पड़ा है
अलमारियों-दराज़ों में,
ढूंढ कर निकालते हैं उसे,
फेंक आते हैं कूड़ेदान में.

एक बाल्टी लेते हैं,
डालते हैं ढक्कन-भर
प्यार का फिनायल
और लगा देते हैं पोंछा 
समूचे घर में.

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

४२३. परिंदों की दुनिया

Bird, Western Yellow Wagtail

परिंदों,
निकल जाओ घोंसलों से,
बेख़ौफ़ घूमो,
चंद दिनों के लिए 
हमने छुट्टी ले ली है,
फ़िलहाल यह दुनिया,
जो तुम्हारी भी है,
तुम्हारे हवाले की है.

शनिवार, 11 अप्रैल 2020

४२२. अब जब घर में हो

Monkey, Mirror, Stare, Thinking, Monkey

अब जब घर में हो,
तो कभी आईना देख लेना,
फिर सच-सच बताना,
क्या तुम वही हो,
जो तुम सोचते हो 
कि तुम हो.
***
अब जब घर में हो,
तो उनकी भी सुध लो,
जो सालों से घर में हैं,
पर बेघर हैं.
***
अब जब घर में हो,
तो थोड़ा शांत बैठो,
बहुत भाग चुके ,
इतना कि भागते-भागते तुम
ख़ुद से आगे निकल गए हो.
***
अब जब घर में हो,
तो गिनो, 
तुम्हारे आस-पास कितनी खाइयाँ हैं,
सबको पाटने के लिए तुम्हें 
कितना लम्बा लॉकडाउन चाहिए?

गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

४२१. पंछियों से

Dawn, Sunrise, Early Morning, Skies

पंछियों, इतना मत इतराओ,
किसी भ्रम में न रहो,
हम अभी यहीं हैं,
इसी दुनिया में,
बस चंद रोज़ और,
हम लौट कर आएंगे, 
तुम्हें वापस जाना होगा,
हमारी दुनिया में तुम्हारे लिए 
कहीं कोई जगह नहीं है.

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

४१९. दिया और हवाएँ

Lamp, Earthen, Oil Lamp, Flame, Light
अपनी बालकनी में मैंने 
उम्मीद का एक दिया जलाया,
क्रूर हवाएँ रातभर चलती रहीं,
दिए की लौ लड़खड़ाती रही,
लगा अब बुझी,अब बुझी.

सुबह उठकर मैंने देखा,
दिया जल रहा था बिना तेल के,
बाती का आख़िरी छोर थामे था लौ को,
हवाएँ ख़ामोश थीं,
दूर आकाश में सूरज निकल रहा था.

शनिवार, 4 अप्रैल 2020

४१८. जुगनू

न मेरे पास दिया है,
न तेल, न बाती,
दिवाली की बची 
कोई मोमबत्ती भी नहीं है,
न ही कोई फ़्लैश लाइट है 
मेरे पुराने मोबाइल में.

फिर भी मैं खड़ा हो जाऊंगा 
घर की देहरी पर,
फैला दूंगा हथेलियाँ,
आ बैठेगा उनमें 
कोई-न-कोई जुगनू 
जब बंद हो जाएंगे बल्ब,
जब नहीं जल रही होगी 
कहीं कोई ट्यूबलाइट.

गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

४१७. माँ

Hand, Human, Woman, Adult, Hands

अरसे बाद सब घर में हैं,
मुस्कराती रहती है माँ,
सबको लगता है,
बिल्कुल ठीक है वह,
सबको लगता है,
बीमार नहीं है माँ,
अभी कुछ नहीं होगा माँ को.

**

चल-फिर नहीं सकती थी माँ,
बिस्तर में ही रहती थी,
अब सब घर में हैं,
तो थोड़ा चलने लगी है वह,
सब हैरत में हैं
कि बिना घुटना बदलवाए
कैसे ठीक होने लगी है माँ?

मंगलवार, 31 मार्च 2020

४१६. शोर


Sunset, Birds, Flying, Sky, Colorful

एक पंछी उड़ते हुए आया,
मेरी खिड़की पर बैठा,
पूछा,'पिंजरे में कैसा लगता है?'
मैंने कोई जवाब नहीं दिया,
उसने हँसते हुए पूछा,
'दाना-पानी है न?'
और फुर्र से उड़ गया.

***

उड़े जा रहे हैं 
कुछ पंछी आकाश में
आपस में बतियाते 
कि बहुत शांति है आज,
सब बंद हैं घरों में,
ये जब बाहर होते हैं,
तो कितना शोर मचाते हैं!

***

एक पंछी नाच रहा है सड़क पर,
कह रहा है लोगों से,
अब पिंजरे में रहने के 
तुम्हारे दिन आए,
हम आज़ाद हैं,
तुम्हारी बनाई सड़कों पर 
तुम्हारी अनुमति के बिना 
थोड़ा हम भी फुदकेंगे.

शनिवार, 28 मार्च 2020

४१५. पंछी बनकर देखें

Hello Baby, Sank, Fly, Animal, Nature

थोड़े दिन के लिए 
चलो,पंछी बनकर देखें,
मुँह अँधेरे उठ जायँ,
चहकें साथ मिलकर,
डाली-डाली, पेड़-पेड़ फुदकें,
जहाँ मर्ज़ी बैठें,
उड़ान भरें मुक्त आकाश में,
सूरज को क़रीब से देखें.

अपने ही घर में झांकें
बंद खिडकियों के पार से,
घोंसला बना लें 
कहीं किसी पेड़ पर,
मुंडेर पर रखे कटोरे से 
चोंच-भर पानी पी लें,
आँगन में फेंका गया दाना 
थोड़ा-सा चुग लें.

बहुत देख लिया इंसान बनकर,
लॉकडाउन खुलने तक 
चलो पंछी बनकर देखें.

गुरुवार, 26 मार्च 2020

४१४. खटिया

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वह जो खटिया तुमने 
आँगन के कोने में रखी है,
धूप में तपती है,
बारिश में भीगती है.

निवारें फट रही हैं उसकी,
पाए टूट रहे हैं,
हवा से चरमराती है,
दर्द से कराहती है वह खटिया.

थोड़ी सुध ले लो उसकी,
थोड़ी मरम्मत करा दो उसकी,
चाहो तो आँगन में ही रखो,
पर धूप-बारिश से बचा लो उसको.

कैसे समझओगो आज ख़ुद को,
कैसे अनदेखी करोगे उसकी,
आज तो तुम यह भी नहीं कह सकते 
कि तुम्हारे पास समय नहीं है.

मंगलवार, 24 मार्च 2020

४१३. लॉकडाउन में किताबें

Books, Bookshelf, Library, Literature

सालों बाद ख़ुश हैं 
अलमारी में रखी किताबें,
शायद कोई निकालेगा उनको,
शायद धूल झड़ेगी उनकी.

बुकमार्क काम आएगा शायद,
पलटे जाएंगे किताबों के पन्ने,
पढ़े जाएंगे उनमें लिखे शब्द,
सराहा जाएगा शायद उनको.

झूलेंगी आरामकुर्सी पर किताबें,
कमरे से बालकनी में आएंगी,
खुली हवा में सांस लेंगी,
महसूस करेंगी चाय की महक.

अलमारी में रखी किताबें इंतज़ार में हैं,
रह-रह कर देख रही हैं उम्मीद से,
शायद अब फिरेंगे दिन उनके,
शायद टूटेगा उनका लॉकडाउन.

शनिवार, 21 मार्च 2020

४१२. बेटियां

Adult, Mother, Daughter, Beach, Kids

कच्ची कैरी-सी,
इमली-सी,
गोलगप्पे के चटपटे पानी-सी,
दोने में रखी झालमुड़ी-सी,
झाड़ियों में लगे 
खट्टे-मीठे बेर-सी,
पेड़ पर पड़े झूले-सी,
पत्तों में फुदकती चिड़िया-सी,
फूलों में उडती तितली-सी,
बारिश की फुहार-सी,
जाड़ों की धूप-सी,
बस ऐसी ही होती हैं बेटियां. 

गुरुवार, 19 मार्च 2020

४११. डर


एक डर है,
जो अन्दर गहरे 
घुसा जा रहा है.

नींद की तलाश में 
रातें बिस्तर पर 
करवटें बदलती हैं.

बड़ी देर में होती हैं 
आजकल सुबहें,
सूरज थका-सा लगता है.

दोपहर उदास है,
शाम चिड़चिड़ी-सी,
वक़्त जैसे ठहरा पानी.

चाँद निकल आया है 
आसमान में, लेकिन 
उसमें धब्बे बहुत हैं.

मुझे आश्चर्य होता है 
कि कैसे बदल देता है दुनिया 
एक बिनबुलाया डर.

रविवार, 15 मार्च 2020

४१०.शोला

Bbq, Barbecue, Coal, Flame, Grill


मैं शोला हूँ,
मुझमें घी मत डालो,
भड़क उठूंगा,
छोड़ दो मुझे चुपचाप,
मैं ठंडा हो जाऊंगा,
राख बन जाऊंगा,
तुम्हें पता भी नहीं चलेगा.

**

मैं शोला था,
राख का बोझ सहता रहा,
तुम आए,
फूँक भी नहीं मारी 
और वापस लौट गए.

गुरुवार, 12 मार्च 2020

४०९.परिवर्तन

Train, Wagon, Windows, Railway

रेलगाड़ी,अब वे दिन कहाँ?

लोग इंतज़ार करते थे, 
ख़ुश होते थे,
जब तुम सीटियाँ बजाती आती थी,
बाँध लेते थे बोरिया-बिस्तर
तुमसे मिलने को बेक़रार रहते थे.

अब तो मजबूरी में मिलते हैं,
उड़ने को आतुर,
कार में चलने के शौकीन,
तुम साफ़-सुथरी राजधानी 
या शताब्दी भी हो,तो क्या?

मायूस मत होओ, रेलगाड़ी,
बस चलती रहो,जब तक हो,
लोगों को पुकारती,
सबका स्वागत करती,
परिवर्तन ही दुनिया का नियम है.

रविवार, 8 मार्च 2020

४०८. कोरोना और होली

Hand, Rang Barse, Holi, Color, Pink
इस बार की होली 
बहुत अजीब होली है.

जब होलिका दहन होगा,
हम किसी कोने में रहेंगे,
बालकनी में खड़े होंगे 
या टी.वी. पर देखेंगे.

न हाथों में अबीर लेकर 
गाल रंगने का सुख होगा,
न बाँहों में भरकर 
गले लगाने की ख़ुशी.

'होली मुबारक' दूर से
डर-डर के कहेंगे,
मुँह पर मास्क लगाएँगे, 
तब घर से निकलेंगे.

कोरोना,
क्या बिगड़ जाता तुम्हारा,
जो थोड़ा सब्र दिखा देते ?
हम होली खेल चुके होते,
फिर तुम आ जाते.

कभी-कभी सोचता हूँ,
तुम्हारी चुनौती स्वीकार लूं,
हमेशा की तरह इस बार भी 
जी भर के होली खेलूँ.

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

४०७. कड़ाही

Fry, Potatoes, Pan, Cook, Oil, Boil

सिंक में पड़ी कड़ाही को
साफ़ करते हुए वह सोचती है 
कि वह भी कड़ाही जैसी ही है,
आग पर चढ़ाई जाती है,
फिर उतारी जाती है,
रगड़ी जाती है,
खुरची जाती है,
पटकी जाती है,
धोई जाती है.

उसमें और कड़ाही में
बस इतना-सा फ़र्क है
कि कड़ाही को कभी-कभार 
आराम मिल जाता है.

शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

४०६.दर्द की तलाश

मैं तलाश में हूँ 
कि कहीं से थोड़ा 
दर्द मिल जाय.

न उनसे दर्द मिला,
जिनका धर्म अलग है,
न उनसे जिनकी जाति.

उनसे भी सुख ही मिला,
जिनका रंग अलग है,
भाषा भिन्न है.

नीरस हो गई है ज़िन्दगी,
अतिरेक हो गया है सुख का,
जीने के लिए अब दर्द ज़रूरी है.

थक गया हूँ मैं 
दर्द खोजते-खोजते,
कोई मुझे सही-सही बताए 
कि आख़िर दर्द कहाँ रहता है. 

बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

४०५. मंथन

Water, Sea, Churning, Turquoise, Dark

समुद्र तुम्हारे सामने है,
डरो नहीं, मंथन करो,
हो सकता है, विष मिले,
पर अंत में अमृत मिलेगा.

यह मत समझो, तुम अकेले हो,
हिम्मत करो, आगे बढ़ो,
तुम्हारी मदद के लिए 
आ जाएगा कोई विष्णु कहीं से.

रस्सी बन जाएगा कोई शेषनाग,
लिपट जाएगा 'मंदार' से,
तुम एक छोर पकड़ कर खींचो,
दूसरा छोर थाम लेगा कोई-न-कोई.

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

४०४. वह लड़का

Sweater, Woolen Sweater, Knitwear

वह लड़का,
जिसका स्वेटर अधूरा है,
आज मारा गया है दंगों में.
जल्दी पूरा करो,
उसे स्वेटर पहनाना है,
फिर दफ़नाना है.

शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

४०३. सूरज

Seascape, New Zealand, Sunrise

सुबह-सुबह अँधेरा छाया है,
पर घबराने की बात नहीं,
कभी-कभी ऐसा हो जाता है.

यह रात नहीं है,
रात तो बीत चुकी है,
बस सूरज नहीं निकला है,
वह लड़ रहा होगा,
निकलने की कोशिश कर रहा होगा.

अँधेरा कितना ही गहरा हो,
सूरज लड़ना नहीं छोड़ेगा,
वह निकलेगा ज़रूर,
अभी नहीं,तो थोड़ी देर में,
आज नहीं तो कल.

सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

४०२.मेरा प्यार

Ashes, Smoke, Wood, Fire, Fireplace

मेरा प्यार कोई लपट नहीं,
जो धधककर आसमान छू ले
और मीलों दूर से दिखे.
मेरा प्यार राख के नीचे दबी आग है,
जिसे देखने के लिए कुरेदना पड़ता है.

गुरुवार, 30 जनवरी 2020

४०१. मैं और चिड़िया

Bird, Singer, Singing, Chirp, Tweet, Chirrup, Robin

एक मैं हूँ,
जो कभी गाता हूँ,
तो दरवाज़े-खिड़कियाँ 
बंद कर लेता हूँ,
एक वह चिड़िया है,
जो कहीं से 
उड़ती हुई आती है,
मेरी खिड़की के पास 
मुक्त कंठ से गाती है.

मेरी आवाज़ 
मेरे ही घर में 
घुटकर रह जाती है,
उसका गीत 
पूरा मुहल्ला सुनता है.

सोमवार, 27 जनवरी 2020

४००.सौदा

आओ,बाज़ार चलें,
थोड़े आदमी ख़रीदें,
कुछ को प्यार से ख़रीद लेंगे,
कुछ को पैसे से,
कुछ डरकर बिक जाएंगे.

कुछ को ख़रीदने के लिए 
आश्वासन ही काफ़ी होगा,
कुछ ऐसे भी मिलेंगे, 
जो बेमोल बिक जाएंगे.

आज सौदा ज़रूर करेंगे,
भाव ऊंचे रहे तो भी,
किसी को ख़रीद नहीं पाए,
तो ख़ुद को ही बेच आएँगे.

सोमवार, 20 जनवरी 2020

३९९. नए घर में

Architecture, Family House, Front Yard
सुनो,
नए घर में जाओ,
तो पुराना सामान 
ध्यान से देख लेना,
जो बेकार हो,
उसे फेंक देना,
जो काम का हो,
उसे रख लेना.

चादरें रख लेना,
धब्बे फेंक देना,
धागे रख लेना,
गांठें फेंक देना.

नए घर में जाओ,
तो छिड़क देना कमरों में 
थोड़ी मुस्कराहट,
थोड़ा अपनापन,
थोड़ी उम्मीद
और कटोरी-भर प्रेम .

शनिवार, 18 जनवरी 2020

३९८.पुरानी कुरसी

Chair, Old, Antique, Sit, Furniture, Wood, Old Chair

वह कुरसी, जो आँगन में पड़ी है,
बहुत उदास है.

कभी वह बैठक में होती थी,
चमचम चमकती थी,
बड़ी पूछ थी उसकी,
अब वह पुरानी हो गई है,
चमक खो गई है उसकी,
झुर्रियों जैसी लकीरों से 
भर गई है वह कुरसी.

एक हाथ टूट गया है उसका,
एक पांव भी ग़ायब है,
धीरे से भी हवा चलती है,
तो कांपती है वह कुरसी.

पास से गुज़रनेवालों को 
हसरत से देखती है कुरसी,
कोई नहीं बैठता उस पर,
कोई नहीं रखता उससे कोई मतलब.

इन दिनों घबराई हुई है वह कुरसी,
डरती है कि बाहर न फेंक दी जाय 
पूरी तरह टूटने से पहले, 
आजकल नींद में चौंक जाती है कुरसी.

गुरुवार, 16 जनवरी 2020

३९७. नदी और समंदर

                            Waves, Dawn, Ocean, Sea, Dusk, Seascape                     

                                                                  -१- 

सदियाँ बीत गईं,
पर तुम मीठे न हुए,
तुमने उन्हें भी खारा कर दिया,
जो मीलों चलती रहीं,
तुमसे मिलने को तरसती रहीं.

                                               -२-

मैं समंदर में मिलूँ,
खारी हो जाऊं,
इससे अच्छा है 
कि रास्ते में ही सूख जाऊं,
मीठी बनी रहूँ.

                                              -३-  

कुछ मुलाकातें ज़रूरी होती हैं,
पर ज़रूरी नहीं कि अच्छी हों,
जैसे मीठी नदियों का 
खारे समंदर में मिलना.

शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

३९६. मुहल्ले

इससे पहले कि कोई गोली चले,
उस मुहल्ले से इस मुहल्ले की ओर,
घुस जाय मेरी छाती में,
मुझे एक ज़रूरी बात कहनी है.

मुझे कहना है 
कि मेरे कई गहरे दोस्त 
उसी मुहल्ले से हैं,
यहाँ तक कि वह झील 
जिसमें मैं अक्सर डूब जाता हूँ,
उसी मुहल्ले की है.

मुझे कहना है 
कि अगर मुझे गोली लगी,
तो मारे जाएंगे कुछ लोग 
दोनों ही मुहल्लों से.

मुझे जो कहना था,
मैंने कह दिया है,
अगर फिर भी तुम चाहो,
तो गोली चला सकते हो,
अब मैं मरने के लिए 
पूरी तरह तैयार हूँ.

शनिवार, 4 जनवरी 2020

३९५. जीभ

Mouth, Human, Teeth, Open, Tongue

एक जीभ-
मासूम, मुलायम,
बत्तीस दांत-
कठोर,धारदार.

मैं सोच में हूँ,
कैसे बचाएगी 
मेरी जीभ ख़ुद को 
मेरे ही दांतों से?

बुधवार, 1 जनवरी 2020

३९४. दिल्ली में ठण्ड

Winter Landscape, Trees, Snow, Nature

सौ साल बाद टूटा है 
दिल्ली में ठण्ड का रिकॉर्ड,
कुदरत को भी मालूम है 
कि इस बार सर्दियाँ शुरू हुईं,
तो दिल्ली का तापमान 
बहुत बढ़ा हुआ था.