शनिवार, 14 अक्तूबर 2017

२८१. दहशत में जीभ

आजकल गुमसुम रहती है मेरी जीभ ,
बोलती नहीं कुछ भी,
बस चुपचाप पड़ी रहती है मुंह में.

खो गया है उसका अल्हड़पन,
फूल नहीं झरते अब उससे,
मेरी जीभ नहीं करती अब 
रोतों को हंसा देने वाली बातें,
अब नहीं करती वह 
पहले सी ज़िद,
नहीं कहती कहीं भी जाने को,
नहीं कहती कुछ भी खाने को,
सारे स्वाद भूल गई है मेरी जीभ.

अब बच्ची नहीं रही मेरी जीभ ,
अचानक से बड़ी हो गई है,
आजकल मेरी जीभ 
मेरे ही दांतों की दहशत में है.

शनिवार, 7 अक्तूबर 2017

२८०. अंततः

पहले जलता है मेघनाद,
फिर जलता है कुम्भकर्ण.

बचा रहता है रावण देर तक,
क्योंकि सबसे ताक़तवर होता है वह,
पर अंत तो उसका भी होता है,
आख़िर में जलता है वह भी.

सबसे ताक़तवर आख़िर में जलता है,
पर जलना पड़ता है हर आततायी को 
कभी-न-कभी.

शनिवार, 30 सितंबर 2017

२७९. समीक्षा

सुन्दर शब्द चुने हैं तुमने,
खूबसूरती से सजाया है उन्हें,
लय का ध्यान रखा है पूरा,
पर कवि, मुझे नहीं लगता 
कि तुमने जो लिखा है,
उसे कविता कहा जाना चाहिए.

कवि, अगर अपनी कविता में तुम
किसी आम आदमी की दास्तान,
किसी मजदूर की व्यथा,
किसी किसान की वेदना,
किसी गृहिणी का दुःख
या किसी बच्चे की मुस्कराहट का ज़िक्र करते,
तो भी मुझे पक्का यकीन नहीं है
कि तुम जो लिखते, वह कविता होती.

कवि,कविता के लिए एक ही कसौटी है मेरी,
समीक्षा का एक ही मानक है मेरा,
तुम्हारे लिखे को  मैं 
कविता तभी मानूंगा,
जब वह मेरे दिल को छू ले.

शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

२७८. पेड़




क्यों काट रहे हो मुझे?

मैं जो चुपचाप खड़ा रहता हूँ 

अपनी जगह पर,
न सोता हूँ, न बैठता हूँ,
हिलता भी नहीं अपनी जगह से,
क्या दुश्मनी है तुम्हारी मुझसे?

मेरी डालियों पर बने 
घोंसलों को देखो,
जिनमें मासूम चूज़े छिपे बैठे हैं,
उन पंछियों को देखो,
जिनका मैं आसरा हूँ,
उन कीड़ों-मकोड़ों, 
उन जानवरों को देखो,
जो मेरे सहारे ज़िन्दा हैं,
क्या दुश्मनी है तुम्हारी उनसे?

मेरे कोमल पत्तों को देखो,
फूलों और फलों को देखो,
जो तुम्हारे काम आते हैं,
ज़हरीली हवा के बारे में सोचो,
जो मैं पी लेता हूँ,
ताज़ी हवा के बारे में सोचो,
जो मैं तुम्हें देता हूँ,
मेरी छाया को देखो,
जिसमें तुम सुस्ता लेते हो.

मुझे काटने से पहले 
कम-से-कम इतना ही बता दो 
कि तुम्हारी  ख़ुद से दुश्मनी क्या है?

शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

२७७. मदद

मैं सोया हुआ हूँ,
पर साँसें चल रही हैं,
दिल धड़क रहा है,
रक्त शिराओं में बह रहा है.

मैं सोया हुआ हूँ,
पर ये सब जाग रहे हैं,
काम पर लगे हुए हैं,
ताकि मैं सो भी सकूं,
ज़िन्दा भी रह सकूं.