बुधवार, 17 जुलाई 2019

३६८. बारिश


Geranium, Cranes-Bill, Pelargonium

आज बहुत तेज़ बरसा पानी,
धूल-सने पत्ते जमकर नहाए,
गहरी भीग गईं सूखी डालियाँ.

तृप्त हो गईं प्यासी जड़ें,
कलियों ने चुपके से मुंह खोल
गटक लिया थोड़ा-सा पानी.

बारिश रुकने के बाद देर तक
फूलों ने पंखुड़ियों पर थामे रखीं
पानी की दस-बीस बूँदें,
जैसे कि प्यास बुझ गई हो,
पर मन अभी भरा नहीं हो.

शुक्रवार, 12 जुलाई 2019

३६७. भुतहा इमारत

इमारत बहुत उदास है.

न किसी बच्चे की हंसी,
न पायल की छमछम,
न किसी बूढ़े की खांसी,
न कोई कूकर की सिटी,
न बर्तनों की खड़खड़ाहट.

न कोई जन्मा यहाँ,
न कोई मरा,
न कोई कराहा,
न कोई सिसका.

कुछ भी नहीं हुआ यहाँ,
जब से यह भुतहा कहलाई.

इमारत अकेली है,
बहुत उदास है,
सोचती है,
'काश,कोई और नहीं,
तो भूत ही बसते मुझमें.' 



शुक्रवार, 5 जुलाई 2019

३६६. राजधानी का दुःख

मैं राजधानी ट्रेन हूँ,
कहने को राजधानी हूँ,
पर बहुत दुखी हूँ.

मैं गाँव-देहात से होकर 
गुज़रती ज़रूर हूँ,
पर वहां रुकती नहीं,
वहां के लोगों से 
कभी मिलती नहीं,
बस धड़धड़ाकर
आगे निकल जाती हूँ,
जैसे कि मैंने उन्हें 
देखा ही नहीं.

चलती रहती हूँ मैं,
अपने लिए सोचने का 
समय ही कहाँ है,
बड़े स्टेशन आते हैं,
तो ज़रा-सी रुक जाती हूँ,
फिर चल पड़ती हूँ,
जैसे बेमन से रुकी थी.

लोग न जाने क्या समझते हैं,
पर सच में मेरी चलती,
तो मैं राजधानी नहीं,
पैसेंजर होना पसंद करती. 

शुक्रवार, 28 जून 2019

३६५. घास

Countryside, Grass, Grassland, Hill

मैं घास हूँ,
मुझे बोना नहीं होता,
न ही गड्ढा खोदकर 
मुझे रोपना होता है,
न मुझे खाद चाहिए,
न कोई ख़ास देखभाल.

मैं छोटी सही,
गहरी न सही मेरी जड़ें,
पर मैं तिरस्कृत,उपेक्षित,
कहीं भी उग सकती हूँ,
कठोर चट्टानों पर भी.

मुझे कम मत समझना,
मैं जो कर सकती हूँ,
बरगद और पीपल 
कभी नहीं कर सकते.

शनिवार, 22 जून 2019

३६४. इच्छाएँ

Fall, Autumn, Red, Season, Woods, Nature

इच्छाएँ घुमावदार जंगल जैसी हैं,
पहले थोड़ी सी दिखती हैं,
जब वहां पहुँच जाओ,
तो थोड़ी और दिखने लगती हैं,
उनके आगे फिर थोड़ी और.

यह सिलसिला चलता ही रहता है,
इच्छाओं का जंगल कभी ख़त्म नहीं होता.