बुधवार, 25 नवंबर 2020

५०७. दो गज की दूरी



दो गज की दूरी रखिए,

सुरक्षित रहिए,

पर याद रहे 

कि दिलों के क़रीब होने पर 

कोरोना के दिनों में भी 

कोई पाबंदी नहीं है. 

         **

थोड़ी दूरी बनाए रखिए,

बहुत ज़रूरी है इन दिनों,

पर इतनी दूर मत जाइए 

कि दिखाई ही न दे

चेहरों पर फैली उदासी. 

        **

दूरी बनाई,

साबुन लगाया,

सेनेटाइज़र छिड़का,

पास नहीं फटका कोरोना,

पर बच नहीं सका मैं 

पुरानी कड़वी यादों से.  

  



11 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 27-11-2020) को "लहरों के साथ रहे कोई ।" (चर्चा अंक- 3898) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 26 नवंबर नवंबर नवंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह। पुरानी यादों को भला कौन भूल सकता है...

    जवाब देंहटाएं
  4. वर्तमान संदर्भ हेतु अत्यंत आवश्यक
    सुंदर व सार्थक रचना।

    जवाब देंहटाएं
  5. शानदार अभिव्यक्ति 👌👌👌

    जवाब देंहटाएं