गाँव के लोग उठ जाते हैं
मुंह अँधेरे,
पर गाँव का स्टेशन सोया रहता है.
उसे जल्दी नहीं उठने की,
उठ भी जाएगा तो करेगा क्या?
हांफते-हांफते
दोपहर बाद पंहुचेगी
गाँव में रुकनेवाली
इकलौती पैसेंजर ट्रेन
और फिर सन्नाटा.
कभी गाड़ी लेट हो जाती है
या रद्द हो जाती है,
तो अकेलापन महसूस करता है
गाँव का स्टेशन,
बहुत उदास हो जाता है
गाँव का स्टेशन,
सोचता है कि अगर वह नहीं होता
तो भी गाँव को
शायद ही कोई फ़र्क पड़ता.
मुंह अँधेरे,
पर गाँव का स्टेशन सोया रहता है.
उसे जल्दी नहीं उठने की,
उठ भी जाएगा तो करेगा क्या?
हांफते-हांफते
दोपहर बाद पंहुचेगी
गाँव में रुकनेवाली
इकलौती पैसेंजर ट्रेन
और फिर सन्नाटा.
कभी गाड़ी लेट हो जाती है
या रद्द हो जाती है,
तो अकेलापन महसूस करता है
गाँव का स्टेशन,
बहुत उदास हो जाता है
गाँव का स्टेशन,
सोचता है कि अगर वह नहीं होता
तो भी गाँव को
शायद ही कोई फ़र्क पड़ता.



