जितना झुक सकता था,
उससे ज़्यादा झुक गया हूँ मैं,
जीने के लिए अब उठना,
सीधा खड़ा होना ज़रूरी है।
और मत झुकाओ मुझे,
ज़रा सीधा होने दो,
इतना झुक चुका हूँ मैं
कि मुझे साफ़-साफ़ दिखने लगा है
अपना ज़रूरत से ज़्यादा झुकना,
तुम्हारा ज़रूरत से ज़्यादा तनना।