शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

२९६.अँधेरे में

ऐसा क्यों होता है 
कि कुछ लोगों को हमेशा 
अँधेरे में रहना पड़ता है 
और कुछ के जीवन से 
उजाला दूर ही नहीं होता?

क्या ऐसा संभव नहीं 
कि सब हमेशा उजाले में रहें?
अगर नहीं, तो कम-से-कम इतना हो जाय 
कि हरेक के हिस्से में 
समान अँधेरा और उजाला हो.

अगर यह भी संभव नहीं,
तो आओ, ख़ुदा से कहें 
कि अपना उजाला वापस ले ले 
और सब को एक साथ,एक तरह से 
अँधेरे में ही रहने दे.

4 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ०५ फरवरी २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह
    बहुत सुंदर सृजन
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  3. सब क़िस्मत की बातें हैं ...

    उत्तर देंहटाएं