शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2016

२३३. दिवाली में दृष्टि परिवर्तन




दियों की रोशनी कुछ कम है इस बार,
तेल तो उतना ही है,
बाती भी वैसी ही है,
हवाएं भी नहीं हैं उपद्रवी,
फिर भी कम है रोशनी.

कहीं ऐसा तो नहीं 
कि रोशनी उतनी ही है,
पर आँखें कमज़ोर हो गई हैं
या यह भी हो सकता है 
कि आँखें कमज़ोर नहीं हुईं,
मन में ही कुछ फ़र्क आ गया है.

इस बार की दिवाली में 
सब कुछ पहले जैसा है,
कुछ भी नहीं बदला है,
पर दियों की रोशनी कुछ कम है.

मुझे लगता है 
कि इस बार की दिवाली में 
दृष्टि परिवर्तन की ज़रूरत है. 

10 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर ।
    दीपावली की शुभकामनाएं ।

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 30 अक्टूबर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. ब्लॉग बुलेटिन टीम और मेरी ओर से आप सभी को छोटी दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं|


    ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "छोटी दिवाली पर देश की मातृ शक्ति को बड़ा नमन“ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. बहुत खूब लिखा है ... परिवर्तन हर चीज में जरूरी है ...

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  5. दीपावली की शुभकामनाएं .

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  6. बहुत ही उम्दा लिखावट , बहुत ही सुंदर और सटीक तरह से जानकारी दी है आपने ,उम्मीद है आगे भी इसी तरह से बेहतरीन article मिलते रहेंगे
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  7. वाह क्या सुंदर लिखावट है सुंदर मैं अभी इस ब्लॉग को Bookmark कर रहा हूँ ,ताकि आगे भी आपकी कविता पढता रहूँ ,धन्यवाद आपका !!
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