सोमवार, 9 नवंबर 2015

१९०. आनेवाली दिवाली


आनेवाली है दिवाली,
जलेंगे दिए,
बनेंगे पकवान,
सजेगी रंगोली. 

दिए भले कम हों,
पर ज़्यादा घरों में जलें,
पकवान भले कम बनें,
पर ज़्यादा होंठों तक पहुंचे,
रंगोली के रंग भले कम हों,
पर ज़्यादा आंगनों में सजें।

इस बार की दिवाली 
चमकीली भले कुछ कम हो,
पर उसकी रोशनी का दायरा 
पिछली बार से थोड़ा बड़ा हो.

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (11.11.2015) को "दीपावली विशेषांक"(चर्चा अंक-2157) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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  2. क्या बात है !.....बेहद खूबसूरत रचना....
    आप को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@आओ देखें मुहब्बत का सपना(एक प्यार भरा नगमा)
    नयी पोस्ट@धीरे-धीरे से

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  3. बहुत ही सुंदर रचना। आपको भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपको दीप पर्व की सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें!

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  5. ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सब को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !!
    ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, दीपावली की चित्रावली - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  6. दीप पर्व की शुभकामनाएँ। सुन्दर रचना।

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