शनिवार, 29 अगस्त 2015

१८१. बहन



मुझे याद आती हैं
वे बचपन की बातें,
लूडो,सांप-सीढ़ी का खेल,
आम के पेड़ से कैरियाँ तोड़ना,
मुंह अँधेरे उठकर
बगीचे से फूल चुनना.

मुझे याद आता है
मंदिर में पलाथी मार कर
साथ-साथ पूजा करना,
दुर्गापूजा के पंडालों में घूमना,
सज-धजकर विसर्जन देखना.

हाँ, याद आता है
रात-रात भर जागकर
अंत्याक्षरी खेलना,
छोटी-छोटी बात पर झगड़ना,
फिर बिना देर किए
सुलह कर लेना.

मुझे याद आता है
कि मेरी छोटी-छोटी ज़रूरतों का
कितना ध्यान था तुम्हें,
कभी नहीं भूलती थी तुम
कि मुझे भिंडी की भाजी
और संतरे बहुत पसंद थे.

मुझे याद आती है
मेरी बीमारी में तुम्हारी उदासी,
मेरी सफलता में तुम्हारी ख़ुशी,
मेरी ख़ुशी में तुम्हारी हंसी.

तुमसे मैंने जाना
कि किस तरह बहनें
एक दिन माँ जैसी हो जाती हैं,
फ़र्क़ बस इतना होता है
कि वे उम्र में छोटी होती हैं
और एक न एक दिन उन्हें
पराए घर जाना होता है.

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 31 अगस्त 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. भाई बहन के बचपन के पल की यादों को समेटते लाजवाब रचना ...

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  3. अपनी बहन ही सबसे पहली दोस्त होई है...सुंदर प्रस्तुति...

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  4. लाज़वाब...बहुत सुन्दर भावपूर्ण

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  5. तुमसे मैंने जाना
    कि किस तरह बहनें
    एक दिन माँ जैसी हो जाती हैं,
    फ़र्क़ बस इतना होता है
    कि वे उम्र में छोटी होती हैं
    और एक न एक दिन उन्हें
    पराए घर जाना होता है.

    बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना.

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  6. बहन के साथ बिताएँ दिनों की याद दिलाती कविता
    http://savanxxx.blogspot.in

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  7. बहुत प्यारा बंधन होता है भाई -बहन का । बहुत सुंदर भाव ।

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  8. सुन्दर व सार्थक रचना ..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

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