शुक्रवार, 20 मार्च 2015

१६१. बुझता दिया

मेरी बाती जल गई है,
तेल चुक गया है,
लौ मद्धिम हो गई है,
फिर भी मुझमें आग है.

मुझे कमज़ोर मत समझना,
जब तुम मुझे मरा समझ लोगे,
मैं ठीक उसी वक़्त भभकूंगा
और खुद मरने से पहले,
तुम्हें भी खाक कर दूंगा. 

10 टिप्‍पणियां:

  1. भारतीय नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार 22-03-2015 को चर्चा मंच "करूँ तेरा आह्वान " (चर्चा - 1925) पर भी होगी!

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  2. मैं आपके बलोग को बहुत पसंद करता है इसमें बहुत सारी जानकारियां है। मेरा भी कार्य कुछ इसी तरह का है और मैं Social work करता हूं। आप मेरी साईट को पढ़ने के लिए यहां पर Click करें-
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  3. आग्नि का जज्बा दीप का जज्बा काश इंसान का जज्बा भी बन जाए ...
    बहुत खूब है रचना ...

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  4. सुन्दर शब्द रचना............ बधाई
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  5. बहुत खूब, मंगलकामनाएं आपको !!

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  6. सुन्दर व सार्थक अभिव्यक्ति...मंगलकामनाएँ

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  7. ये जज्बा सब में कायम रहे।

    शुभकामनायें।

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