शुक्रवार, 8 अगस्त 2014

१३४. कविता

मन के आसमान में आज 
छाए हैं घने-काले बादल 
विचारों और खयालों के,
तेज़ बह रही हैं 
कल्पनाओं की आंधियां,
फिर भी न जाने क्यों 
बरस नहीं रही एक भी बूँद, 
लिखी नहीं जा रही 
एक भी कविता....

3 टिप्‍पणियां:

  1. ख्‍यालों का साया ऐसा भी होता है .... कभी - कभी

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  2. होता है मन ऐसा भी कभी कभी ... शब्द बंध नहीं पाते ...

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  3. उम्दा, बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ

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