शनिवार, 9 नवंबर 2013

१०३. प्यार

सुनो, मुझे तुमसे कुछ कहना है,
हँसना नहीं,
बस ध्यान से सुनना,
कभी भी, कहीं भी,
किसी कमज़ोर क्षण में भी 
यह मत कहना 
कि तुम्हें मुझसे प्यार है.

अच्छा है
कि तुम्हारे प्यार का एहसास
मुझे अपने आप हो.
कहीं ऐसा न हो 
कि तुम कह दो,
तुम्हें मुझसे प्यार है 
और मुझे कुछ महसूस ही न हो.

लोग जो कहते हैं,
ज़रुरी नहीं 
कि सच ही हो.
हो सकता है, 
उन्हें पता हो 
कि जो वे कह रहे हैं,
दिल रखने के लिए कह रहे हैं.
यह भी हो सकता है,
उन्हें लगता हो 
कि जो वे कह रहे हैं,
वह सच है,
पर वास्तव में वह सच न हो.

इसलिए कहता हूँ,
कभी बहुत दिल करे 
तो भी मत कहना
कि तुम्हें मुझसे प्यार है.
मेरे लिए इतना बहुत है 
कि बिना कुछ कहे-सुने
तुम मुझे महसूस करा दो 
कि तुम्हें मुझसे प्यार है.

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (10-11-2013) को सत्यमेव जयते’" (चर्चामंच : चर्चा अंक : 1425) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. प्यार के लिये भाव चाहिये,
    सही कहा,प्यार का अहसास करना
    ही काफी है.

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  3. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने.....

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  4. महसूस कराना ही जरूरी है प्यार में कहने न कहने से कुछ नहीं होता ...
    भाव भरी रचना ...

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  5. मेरे लिए इतना बहुत है
    कि बिना कुछ कहे-सुने
    तुम मुझे महसूस करा दो
    कि तुम्हें मुझसे प्यार है. nice lines

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