शुक्रवार, 17 मई 2013

८१. बूँद-बूँद


अभी-अभी शुरू हुआ है नल,
बूँद-बूँद आ रहा है पानी,
धीरज रखो, प्यास ज़रूर बुझेगी,
नहा सकेगा पूरा परिवार,
दाल-चावल पकेंगे, आटा गुन्धेगा,
सफाई हो सकेगी आँगन की,
भरी होंगी बाल्टियाँ गुसलखाने में.

बूँद-बूँद आ रहा है पानी,
परेशान क्यों हो, आने दो,
क्या सुना नहीं तुमने 
कि बूँद-बूँद से घड़ा भरता है?
तुम्हारा भी भर जाएगा,
बस यह मत पूछना कि 
इस तरह घड़ा भरने में 
समय कितना लगता है.

6 टिप्‍पणियां:

  1. बूंद बूंद का खेल खेलता पानी ... या शासन ...

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  2. बूँद-बूँद आ रहा है पानी,
    परेशान क्यों हो, आने दो,
    क्या सुना नहीं तुमने
    कि बूँद-बूँद से घड़ा भरता है?------

    वाह जीवन जीने के सच को व्यक्त करती सहज अनुभूति
    सुंदर रचना
    बधाई


    आग्रह है मेरे ब्लॉग"उम्मीद तो हरी है' में सम्मलित हों
    http://jyoti-khare.blogspot.in

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  3. कि बूँद-बूँद से घड़ा भरता है?
    तुम्हारा भी भर जाएगा,
    बस यह मत पूछना कि
    इस तरह घड़ा भरने में
    समय कितना लगता है.

    ...बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...

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  4. बूंद बूंद में उम्मीद ....

    अच्छी रचना .....!!

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  5. Pahlee baar aayee hun aapke blogpe aur bada achha laga!

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