शनिवार, 10 नवंबर 2012

५५. इस बार की दिवाली

इस बार दिवाली पर अंधेरों में चलें.

उन अंतड़ियों से मिलें,जो कुलबुलाती हैं रोटी को,
उन आँखों से मिलें, जो घबराती हैं रौशनी से,
उन कानों से मिलें, जो तरसते हैं संगीत को,
उन होठों से मिलें, जो थरथरा कर रह जाते हैं.

इस बार दिवाली पर झुकी गर्दनों से मिलें,
उन जुबानों से मिलें, जो उगल न पाईं ज़हर,
उन रोंगटों से मिलें, जो खड़े रहे हमेशा,
उन दांतों से मिलें,जो कटकटा नहीं पाए.

इस बार अनउगी मूंछों से मिलें,
उन बाजुओं से मिलें, जो वज़न से डरते हैं,
उन पाँओं से मिलें, जो पहुंचे नहीं मंजिल तक,
उन दिलों से मिलें, जो डर-डर कर धड़कते हैं.

उन उँगलियों से मिलें, जो उठीं खुद की तरफ,
उन घुटनों से मिलें, जो कराहते रहे दर्द से,
उन आंसुओं से मिलें, जो बह नहीं पाए,
उन मुस्कराहटों से मिलें, जो होठों तक नहीं पंहुचीं.

इस बार चलती-फिरती लाशों से मिलें,
जिंदगी ढो रहे कंकालों से मिलें,
उन चेहरों से मिलें,जिन्होंने ओढ़ी है मुस्कराहट,
उन निशानों से मिलें, जो चोट से बने हैं.

इस बार दिवाली पर अंधेरों में चलें,
साथ में ले चलें-
उम्मीद के दिए,
हिम्मत की बातियाँ,
इरादों का तेल 
और प्यार की माचिस,
देखते हैं, अंधेरों में कितने दिए जलते हैं.

5 टिप्‍पणियां:

  1. आह....मन खराब सा हुआ...
    मगर सच है जीवन के कटु यथार्थ से मुंह मोडना भी ठीक नहीं...

    सशक्त रचना.

    सादर
    अनु

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  2. गहन संवेदनशील प्रस्तुति ... एक कचोट देना वाला सच ...

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  3. दीपक करने आ गए,धरती पर उजियार
    आलोकित संसार है, भाग रहा अंधियार.

    दीपावली की हार्दिक बहुत२ शुभकामनाए,,,,
    RECENT POST:....आई दिवाली,,,100 वीं पोस्ट,

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  4. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .बहुत अद्भुत अहसास.सुन्दर प्रस्तुति.
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को !

    मंगलमय हो आपको दीपो का त्यौहार
    जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार
    ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार
    लक्ष्मी की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार..

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