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बुधवार, 26 अगस्त 2026

866. भूला-भटका रास्ता

 


पेड़ खड़े हैं क़तार में,

किसी के इंतज़ार में, 

न जाने कब आ जाए इस ओर  

कोई अजनबी मुसाफ़िर। 


सावधान खड़े हैं सब,

देख रहे हैं टकटकी बांधे,

न कहीं बादल, न कहीं बारिश,

मौसम अच्छा है आज। 


इस भूले-भटके रास्ते पर 

न कंकड़ हैं, न कांटे,

पर कौन जाता है उधर,  

कोई नहीं जाता जिधर? 


इतना भी डर काहे का,

कोई तो करे हिम्मत,

कोई तो समझे 

कि ऐसे रास्तों पर चलकर ही 

अक्सर मिलती है ढंग की मंज़िल।  



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