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शनिवार, 21 मार्च 2026

848. निश्चय

 



रात को बार-बार चौंकती है,

झटके से उठ जाती है लड़की,

पसीने से लथपथ हो जाती है,

डरकर सहम जाती है लड़की। 


पानी के घूंट हलक से उतारती है, 

उठकर खिड़की तक जाती है, 

चुपके से गली में झाँकती है,

सब कुछ ठीक पाती है लड़की। 


फिर से अपनी जगह लौटकर 

सोने की कोशिश करती है लड़की, 

कल से टी.वी. नहीं देखेगी,

न ही अख़बार पढ़ेगी लड़की। 







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