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बुधवार, 10 दिसंबर 2025

827. वह थी

 


वह जब थी,

तो पता ही नहीं था 

कि वह थी। 


वह बताती भी थी,

तो कोई समझता नहीं था 

कि वह थी। 


अब जब वह नहीं है,

तो पता चला है 

कि वह थी,

पर उसे कभी पता नहीं चलेगा 

कि हमें पता चल गया है 

कि वह थी। 


8 टिप्‍पणियां:

  1. मार्मिक,कम शब्दों में संपूर्ण सार।
    सुंदर अभिव्यक्ति।
    सादर।
    ------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १२ दिसंबर २०२५ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. किसी के जाने के बाद कीमत जानी भी तो क्या…..बहुत खूब

    जवाब देंहटाएं
  3. ह्रदय स्पर्शी रचना हमेशा जाने के बाद ही अहमियत सामने आती है ।

    जवाब देंहटाएं