शनिवार, 4 मई 2019

३५७. खिड़कियों पर लड़कियां

इस घर के सामने 
एक जीवंत गली है,
पर सामने की ओर 
न खिड़की है,
न रोशनदान,
बस एक दरवाज़ा है,
जो बंद रहता है.

इस घर में खिड़कियाँ 
पीछे की ओर हैं,
जिनसे झांको,
तो ठीक सामने 
दीवार नज़र आती है.

इन खिड़कियों से 
मुश्किल से घुसती है 
थोड़ी-सी हवा,
ज़रा-सी धूप.

घर की लड़कियां दिन भर 
इन्हीं खिड़कियों पर बैठी रहती हैं.

9 टिप्‍पणियां:


  1. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (05-05-2019) को

    "माँ कवच की तरह " (चर्चा अंक-3326)
    पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    ....
    अनीता सैनी

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 04/05/2019 की बुलेटिन, " इसलिए पड़े हैं कम वोट - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. नारी स्वतंत्रता की तमाम बातों के बावजूद लड़कियों के जीवन की विडंबना को सांकेतिक तरीके से भलीभाँति उजागर कर दिया आपने।

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  4. लड़कियों के लिए जीवंतता वर्जित जो है,

    सुंदर अभिव्यक्ति

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  5. लड़कियों के जीवन का सटीक चित्रण। बहुत सुंदर...

    जवाब देंहटाएं
  6. आवश्यक सूचना :

    सभी गणमान्य पाठकों एवं रचनाकारों को सूचित करते हुए हमें अपार हर्ष का अनुभव हो रहा है कि अक्षय गौरव ई -पत्रिका जनवरी -मार्च अंक का प्रकाशन हो चुका है। कृपया पत्रिका को डाउनलोड करने हेतु नीचे दिए गए लिंक पर जायें और अधिक से अधिक पाठकों तक पहुँचाने हेतु लिंक शेयर करें ! सादर https://www.akshayagaurav.in/2019/05/january-march-2019.html

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