शनिवार, 26 अगस्त 2017

२७४. मसालेदार कविता

कविता लिखो,
तो सादी मत लिखना,
कौन पसंद करता है आजकल 
सादी कविता ?
तेज़ मसाले डालना उसमें,
मिर्च डालो,
तो तीखी डालना,
ऐसी कि पाठक पढ़े,
तो मुंह जल जाय उसका,
आंसू निकल जायँ उसके,
पता चल जाय उसे 
कि किसी कवि से पाला पड़ा था.

कविता लिखो,
तो रेसिपी ऐसी रखना 
कि समझ ही न पाए पाठक 
कि वह बनी कैसे है.

ऐसी कविता लिख सके तुम,
तो डर जाएगा पढ़नेवाला,
वाह-वाह कर उठेगा
और अगर सादी कविता लिखी,
उसकी समझ में आ गई,
तो हो सकता है 
वह तुम्हें कवि मानने से ही 
इन्कार कर दे.  


11 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल jbfवार (27-08-2017) को "सच्चा सौदा कि झूठा सौदा" (चर्चा अंक 2709) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 27 अगस्त 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. वाह्ह्ह...क्या खूब लिखी आपने👌👌

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  4. बहुत ख़ूब ! क्या लिखते हैं बहुत सार्थक प्रयास आभार ,"एकलव्य"

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  5. सटीक और धारदार व्यंग-कविता। वाह -वाह कहता है मन।

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  6. बहुर खूब ... सुन्दर व्यंग कमल की रचना है ...

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  7. वाह...क्या खूब लिखा है...सटीक व्यंग..

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