शुक्रवार, 30 जून 2017

२६६.विस्मृति

मैं कभी भूल जाऊं,
तो तुम मुझे याद दिला देना.

मुझे याद रहेगा,
कहाँ-कहाँ हैं हमारे मकान,
हमारे खेत, हमारी दुकान,
कहाँ-कहाँ हैं तुम्हारे गहने,
हीरे-मोती, सोना-चांदी,
किस-किस बैंक में हैं हमारे खाते,
किस स्कीम में जमा है कितनी पूँजी,
किसको दिया है कितना उधार.

सब कुछ रट सा गया है,
कुछ भी नहीं भूलूंगा मैं,
पर मुमकिन है, कभी भूल जाऊं 
कि तुम कौन हो.

कभी ऐसा हो जाय,
तो तुम मुझे याद दिला देना.

12 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर कविता....
    याद दिलाना भी प्रेम है :)

    उत्तर देंहटाएं
  2. पर मुमकिन है, कभी भूल जाऊं
    कि तुम कौन हो.

    कभी ऐसा हो जाय,
    तो तुम मुझे याद दिला देना... एक सत्य दिल को छूता हुआ

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (02-07-2016) को "ब्लॉगिंग से नाता जोड़ो" (चर्चा अंक-2653) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह !!!
    मन के भीतर पलते सच का वास्तविक चित्रण
    बहुत खूब

    शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  5. कविताएं अच्छी जरूर लगती हैं पर समझ कम है। तुकबंदी से आगे नहीं बढ़ पाया कभी :-)

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सही .... ऐसे में समय में दूर ना हों बल्कि जुड़ने का भाव रखें ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. ओह ...भौतिक चीजें याद रहेंगी ....सहचर्य नहीं ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. लिखे शब्द प्रभावशाली हैं , लिखते रहें

    जाने कितने ही बार हमें, मौके पर शब्द नहीं मिलते !
    बरसों के बाद मिले यारो,इतने निशब्द,नहीं मिलते ! -सतीश सक्सेना
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत खूब ... कितना कुछ याद रखना है जिंदगी में ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह...बहुत प्रभावी रचना...

    उत्तर देंहटाएं