शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

२४९. चले गए

बरसों से जो साथ थे, अचानक बिछड़ गए,
जाने कहाँ से आए थे, कहाँ चले गए.

आसां नहीं होता दिल की बात कह देना,
मैं सोचता ही रह गया,वे उठकर चले गए.

अरसे बाद लौटकर वे घर को आए हैं,
लौटना ही था, तो फिर किसलिए चले गए.

न जाने मेरी नज़रों में क्या दिखा उनको,
वे तमतमाए,उठे,महफ़िल से चले गए.

मत सोचो,क्या होगा,जब तुम नहीं होगे,
कितने यहाँ आए, कितने चले गए.

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 26 फरवरी 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत खूब ... नए अंदाज के शेर और सभी लाजवाब ...

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