शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

२३०. प्यार

बहुत चाहता हूँ मैं तुम्हें,
ख़ुद से भी ज़्यादा,
कोई फ़िल्मी डायलाग नहीं है यह,
हकीक़त है,
जैसे किस्से कहानियों में
राजा की जान तोते में होती थी,
मेरी तुममें है.

सब कहते हैं
कि तुम्हारे लिए मेरा प्यार
उनकी समझ से परे है,
सब कहते हैं
कि तुम इतना प्यार डिज़र्व नहीं करते,
सच कहूं ,
तो मुझे भी यही लगता है,
पर प्यार यह देखकर तो नहीं होता
कि कौन उसके लायक है
और कितना.

मैं जानता हूँ
कि तुम उतने प्यार के हक़दार नहीं
जितना मैं तुम्हें करता हूँ,
पर मैं चाहूं भी
तो कुछ नहीं कर सकता,
क्योंकि यह मैं नहीं,
मेरा दिल है,
जो तुम्हें प्यार करता है.

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 02 अक्टूबर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल रविवार (02-10-2016) के चर्चा मंच "कुछ बातें आज के हालात पर" (चर्चा अंक-2483) पर भी होगी!
    महात्मा गान्धी और पं. लालबहादुर शास्त्री की जयन्ती की बधायी।
    साथ ही शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुर खूब .... प्रेम को लिख दिया ...

    उत्तर देंहटाएं