रविवार, 25 अक्तूबर 2015

१८८. पट्टेवाले कुत्ते



कुत्ते जो बंद कमरों में 
नर्म बिस्तर पर सोते हैं,
बढ़िया खाना खाते हैं,
प्यार से पुकारे जाते हैं,
दुलारे-पुचकारे जाते हैं,
बड़े बेचारे-से लगते हैं,
जब गले में पट्टा डालकर 
सैर पर ले जाए जाते हैं. 

इन्हें देखकर भौंकते हैं 
गली के आवारा कुत्ते 
और ये पट्टे से बंधे 
चुपचाप चले जाते हैं. 

बिरादरी से अलग-थलग,
इन्हें देखकर लगता है 
कि इन्हें सिर्फ़ दुम दबाकर 
निकल जाना आता है,
न काटना आता है,
न भौँकना. 

6 टिप्‍पणियां:

  1. जय मां हाटेशवरी....
    आप ने लिखा...
    कुठ लोगों ने ही पढ़ा...
    हमारा प्रयास है कि इसे सभी पढ़े...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना....
    दिनांक 26/10/2015 को रचना के महत्वपूर्ण अंश के साथ....
    चर्चा मंच[कुलदीप ठाकुर द्वारा प्रस्तुत चर्चा] पर... लिंक की जा रही है...
    इस चर्चा में आप भी सादर आमंत्रित हैं...
    टिप्पणियों के माध्यम से आप के सुझावों का स्वागत है....
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    कुलदीप ठाकुर...


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  2. बहुत खूब और बिल्‍कुल सही। मेरे ब्‍लाग पर आपका स्‍वागत है।

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  3. बहुत सुन्दर और सटीक रचना...

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  4. चेतना पर सीधा प्रहार ! अति सुन्दर !

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