शनिवार, 24 मार्च 2012

२७. आओ, हंसें 


बहुत दिन हो गए हँसे,
आओ, आज तोड़ दें बंधन,
भुला दें शिकवे-शिकायतें,
निकाल फेंकें मन का गुबार,
निहारें काँटों के बीच खिले फूल,
याद करें  पुराने मीठे पल.


आओ, आज खुलकर हंसें,
ऐसे कि पागलों से लगें,
कि आंसू आ जाय आँखों में,
कि लोग देखें मुड़-मुड़ कर,
जैसे कि बाढ़ आ जाय 
किसी गुमसुम नदी में अचानक.


आओ, आज खूब हंसें,
हँसते रहें सुबह से शाम तक,
जैसे आज हमें मरना हो.

12 टिप्‍पणियां:

  1. कोई भी बंधन जब दूँ घोटने लगे ... तो उसका टूटना ही मुनासिब है .... और जो आपने अंत किया है वो कमाल का है ... !!

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  2. बहुत खूब..........
    आओ, आज खुलकर हंसें,
    ऐसे कि पागलों से लगें,

    आपने हँसने कहा...यहाँ आँख भर आई...

    अनु

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  3. आओ, आज खूब हंसें,
    हँसते रहें सुबह से शाम तक,
    जैसे आज हमें मरना हो.

    ...बहुत खूब! सच में हँसना ही जीवन की निशानी है...

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  4. आओ, आज खुलकर हंसें,
    ऐसे कि पागलों से लगें,
    कि आंसू आ जाय आँखों में,
    कि लोग देखें मुड़-मुड़ कर,
    जैसे कि बाढ़ आ जाय
    किसी गुमसुम नदी में अचानक.
    waah

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  5. अगर हम हंस सकें.. अपने सुखों के साथ अपने दु:खों पर, अपनी नाकामयाबियों पर, अपनी विडंबनाओं पर, अपने आप पर.. तो हम जीवन का अर्थ जान जाएंगे। सुंदर कविता..

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  6. हंसते रहें सुबह से शाम तक जैसे हमे मरना हो...

    वाह! क्या बात है!! मस्त कविता, जीवंत दर्शन।

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  7. कल 26/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से नव संवत्सर व नवरात्रि की शुभकामनाए।

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  9. सबसे पहले हमारे ब्लॉग 'जज्बात....दिल से दिल तक' पर आपकी टिप्पणी का तहेदिल से शुक्रिया.........आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ...........पहली ही पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब...........आज ही आपको फॉलो कर रहा हूँ ताकि आगे भी साथ बना रहे|

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  10. सुंदर भाव ...हँसना बहुत ज़रूरी है ॥

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  11. हँसते रहे मुह खोलकर बरसों
    आज दिल खोलकर हंसा जाएँ (साभार परिवर्तित)

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  12. अति उत्तम रचना..
    सुन्दर भाव अभिव्यक्ति....

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