मंगलवार, 24 मार्च 2020

४१३. लॉकडाउन में किताबें

Books, Bookshelf, Library, Literature

सालों बाद ख़ुश हैं 
अलमारी में रखी किताबें,
शायद कोई निकालेगा उनको,
शायद धूल झड़ेगी उनकी.

बुकमार्क काम आएगा शायद,
पलटे जाएंगे किताबों के पन्ने,
पढ़े जाएंगे उनमें लिखे शब्द,
सराहा जाएगा शायद उनको.

झूलेंगी आरामकुर्सी पर किताबें,
कमरे से बालकनी में आएंगी,
खुली हवा में सांस लेंगी,
महसूस करेंगी चाय की महक.

अलमारी में रखी किताबें इंतज़ार में हैं,
रह-रह कर देख रही हैं उम्मीद से,
शायद अब फिरेंगे दिन उनके,
शायद टूटेगा उनका लॉकडाउन.

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 25 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर।
    --
    सुप्रभात आपको।
    घर मे ही रहिए, स्वस्थ रहें।
    कोरोना से बचें।
    भारतीय नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  3. अति सुंदर रचना
    कोरोना से बचें घर में रहे
    आपको भारतीय नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26.3.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3652 में दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

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  5. झूलेंगी आरामकुर्सी पर किताबें,
    कमरे से बालकनी में आएंगी,
    खुली हवा में सांस लेंगी,
    महसूस करेंगी चाय की महक.
    बहुत सार्थक सृजन।

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  6. बहुत खूब ओंकार जी ! किताबों के भी दिन बहुरे हैं | हर साहित्य प्रेमी तालाबंदी में यही कर रहा होगा | वैसे हम महिलाओं का काम इस स्थिति में बहुत बढ़ गया है | कम से कम मैं तो फिलहाल किताब पढने से बहुत दूर हूँ | सादर --

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  7. अहा! किताबों को कितना अच्छा लगेगा. बहुत प्यारी रचना.

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