शनिवार, 22 मार्च 2014

११९. मेंढक


मैंने सुना है कि
मेंढक लुप्त हो रहे हैं,
फिर चुनाव के दौरान 
इतने कहाँ से निकल आते हैं?
बिना बारिश के भी 
इनकी टर्र-टर्र क्यों सुनाई पड़ती है?

मुझे नहीं लगता 
कि मेंढक लुप्त हो रहे हैं,
ज़रूर कुछ भ्रम हुआ है,
मुझे तो लगता है 
कि इनकी बहुतायत हो गई है,
बस इनके निकलने और टरटराने का 
मौसम बदल गया है.

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर.
    शायद मौसम का तकाजा है.

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  2. ये मेंढक कूएं के नहीं है...दुनिया देखी है इन्होने और लोगों को कूएं में धकेलने आये हैं ये !!
    :-/

    सादर
    अनु

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  3. देश आम सा
    नेता गुठली फेके
    उपत्यका में ।
    ====
    पार्टी बदलना ..... दल बदलना ...... राजनीति का काला पहलू ......
    चुनाव का मखौल
    मत का अपमान
    जनता के साथ विश्वासघात
    सज़ा कोई नहीं
    =====
    स्वार्थ विकट
    यात्री हो बेटिकट
    मेवा टिकट ।
    ==

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  4. करार व्यंग ... यस मेंढक सब को लुप्त कर देंगे ...

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  5. बहुत सटीक व्यंग...चुनाव के मौसम के बाद सब गायब हो जायेंगे...लाज़वाब...

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