शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

६०. असंतुलन

आजकल मेरे सिर का बोझ 
मेरी गर्दन से सहन नहीं होता, 
सिर से अलग तो हो नहीं सकती,
बस दर्द से कराहती रहती है.

मेरे घुटनों से सहन नहीं होता 
आजकल मेरे बदन का बोझ,
साथ रहना तो मजबूरी है,
बस दर्द से परेशान रहते हैं.

मेरी ज़रूरतों का बोझ नहीं उठता 
आजकल मेरी मेहनत से,
मेरी ख्वाहिशों का बोझ 
मेरे ईमान से सहन नहीं होता.

इन दिनों मैं संतुलन में नहीं हूँ,
लड़ रहा हूँ अपने आप से,
आजकल मेरे ही दो हिस्से 
एक दूसरे के विरोध में हैं.

14 टिप्‍पणियां:

  1. Apne hi badan ki sansad me aisa antarvirodh shayad kisi nayi duniya ki buniyaad hai.Achchhi rachna.

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  2. मेरी ख्वाहिशों का बोझ
    मेरे ईमान से सहन नहीं होता.
    वाह ... बहुत ही बढिया ...

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  3. हर आम आदमी की यही त्रासदी है ... गहन अभिव्यक्ति ।

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  4. बहुत खूब लिखा ओंकार जी....
    दिल दहल गया इस कटु सत्य को पढ़ कर....जिसका कभी शायद सभी को सामना करना है....
    सादर
    अनु

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  5. इन दिनों मैं संतुलन में नहीं हूँ,
    लड़ रहा हूँ अपने आप से,
    आजकल मेरे ही दो हिस्से
    एक दूसरे के विरोध में हैं.

    बहुत उम्दा भावमय प्रस्तुति ,,,, बधाई।

    recent post हमको रखवालो ने लूटा

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  6. ye dwand vivek sambhal hee lega aur soch ko bhee santulit rakhega....:)
    aabhar

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  7. मेरी ज़रूरतों का बोझ नहीं उठता
    आजकल मेरी मेहनत से,
    मेरी ख्वाहिशों का बोझ
    मेरे ईमान से सहन नहीं होता.

    ओंकार जी बहुत उम्दा बात कही आपने
    ख्वाहिशें कभी कभी उसूलों से टकराने लगती हैं
    पर जिनकी जड़ें मज़बूत होती हैं
    उन्हे छोटे-मोटे तूफ़ान हिला नहीं पाते ....

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  8. इन दिनों मैं संतुलन में नहीं हूँ,
    लड़ रहा हूँ अपने आप से,
    आजकल मेरे ही दो हिस्से
    एक दूसरे के विरोध में हैं.

    बहुत बढ़िया रचना....

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  9. आपका पोस्ट पढ़कर अच्छा लगा। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा।

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  10. मेरी ज़रूरतों का बोझ नहीं उठता
    आजकल मेरी मेहनत से,
    मेरी ख्वाहिशों का बोझ
    मेरे ईमान से सहन नहीं होता.

    ....बहुत सटीक और भावपूर्ण रचना..बहुत सुन्दर

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  11. उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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  12. इन दिनों मैं संतुलन में नहीं हूँ,
    लड़ रहा हूँ अपने आप से,
    आजकल मेरे ही दो हिस्से
    एक दूसरे के विरोध में हैं.

    सुंदर प्रस्तुति।।।

    उत्तर देंहटाएं