रविवार, 17 जून 2012

३७. रिटायरमेंट

मैं रिटायरमेंट से बहुत डरता हूँ ।

उस दिन समारोह होंगे,
उपहार दिए जायेंगे,
दुश्मन भी मुस्कराकर स्वागत करेंगे,
भाषणों में बखान होगा
मेरी योग्यता और योगदान का,
मेरे गुण, जो हैं या नहीं हैं,
चुन चुन कर गिनाये जायेंगे,
खुद को पह्चानना भी मुश्किल होगा,
कन्नी काट कर निकलने वाले भी
रुवांसे हो जायेंगे ।

बहुत कुछ वैसा ही होगा,
जैसा मौत पर होता है ।

पर अगले दिन से
बदल जायेगी दुनिया,
न किसी का फोन आएगा,
न किसी से बात होगी,
मिलने पर भी लोग
बेगानों जैसे पेश आयेंगे ।

मैं रिटायरमेंट से बहुत डरता हूँ,
इतना तो मौत से भी नहीं डरता,
मौत के बाद कुछ दिन ही सही
लोग याद तो रखते हैं !

6 टिप्‍पणियां:

  1. एक स्वाभाविक सा डर सहजता से अभिव्यक्त हुआ है...!

    ...But, days after retirement can also be a time one can look forward to, After all that's when one has all the time to oneself that can be lived as one wishes to!

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  2. मत डरिये.............
    बल्कि रिटायरमेंट के बाद जो मिलने आयेंगे वे आपके अपने होंगे...जिनके मिलने में कोई स्वार्थ न होगा....
    बड़ा आनंद आएगा....

    सादर

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  3. रिटायरमेंट की कविताा भेजे

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  4. अब यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि वह सेवानिवृत्ति के अवसर को कैसे लेता है और आगे की जिंदगी जिसे स्वर्ण काल भी कहते हैं कैसे जीता है। परिवार के लिए, समाज के लिए, देश के लिए उपयोगी बनकर या तमाम बीमारियों से ग्रस्त, गंदे शौकों और गंदे लोगों के साथ समाज में गलीच बनकर बुरे हाल में इस दुनिया से कूच करता है।

    अतः सेवानिवृत्ति वह अवसर है जब आदमी का एक तरह से पुनर्जन्म होता है। उसे इस अवसर का सही उपयोग करना चाहिए। इसी में सब का भला है।

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  5. रिटायर होते होंगे मर्द औरते कभी रिटायर नहीं होती
    हॉ छूट जाती हैं घड़ी केअलार्म से
    अब थोड़ी देर और सौ सकती हैं आराम से
    काम तो अब भी वैसे ही करना होगा
    मगर थोड़ी देर फुर्सत भी मिलेगी काम से
    शॉपिंग भागते भागते और सिर्फ जरूरत के लिए ही नहीं
    भरपूर मस्‍ती से गैर जरूरत के लिए बिना सामान के
    सिफ्र विंडो शॉपिंग ही होगी रिटायरमेंट की अगली शाम से
    पूनम सुभाष मुख्‍य राजभाषा अनुवादक एचपीसीएल

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