शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

१८. आधा-आधा 


आधा-आधा बँट गया सब कुछ,
पर लगता है, ठीक से नहीं  बँटा.


जो आधा तुम्हारे पास है,
कितना अच्छा होता 
अगर मेरे पास होता,
तुम्हें भी लगता होगा
कि जो आधा मेरे पास है,
तुम्हें मिलता तो अच्छा होता.


तुम्हारा आधा मुझे 
आधे से ज़्यादा लगता है,
और अपना आधा तुम्हें 
आधे से कम लगता होगा.


पूरे को इस तरह बाँटना 
संभव ही नहीं लगता 
कि दोनों आधे बराबर लगें.

10 टिप्‍पणियां:

  1. तुम्हारा आधा मुझे
    आधे से ज़्यादा लगता है,
    और अपना आधा तुम्हें
    आधे से कम लगता होगा.

    भाव पूर्ण बहुत सुंदर पंक्तियाँ,अच्छी प्रस्तुति
    welcome to new post,.....

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  2. तुम्हारा आधा मुझे
    आधे से ज़्यादा लगता है,
    और अपना आधा तुम्हें
    आधे से कम लगता होगा... aisa hi hota hai

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  3. आधा आधा ..कभी आधा नहीं होता
    शुभकामनायें !

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  4. तुम्हारा आधा मुझे
    आधे से ज़्यादा लगता है,
    और अपना आधा तुम्हें
    आधे से कम लगता होगा.


    वाह...बहुत सुन्दर रचना...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  5. तुम्हारा आधा मुझे
    आधे से ज़्यादा लगता है,
    और अपना आधा तुम्हें
    आधे से कम लगता होगा... बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  6. तुम्हारा आधा मुझे
    आधे से ज़्यादा लगता है,
    और अपना आधा तुम्हें
    आधे से कम लगता होगा.

    ....बिलकुल सच कहा है...बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति..बधाई!

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  7. सुंदर दर्शन की कुशल अभिव्यक्ति।

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  8. भावपूर्ण सुंदर रचना ,बेहतरीन प्रस्तुति,......
    welcome to new post...वाह रे मंहगाई

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  9. वाह.........
    बहुत बढ़िया
    दाद देती हूँ आपकी सृजनशीलता पर..

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