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शनिवार, 13 जून 2026

859. कोशिश

 


बहुत कोशिशों से मैंने 

कांटे उगाए हैं खुद में,

पर इसका मतलब यह नहीं 

कि अब फूल नहीं खिलते मुझमें। 


मेरे पास आओगे,

तो काँटों का सामना करना पड़ेगा,

मैं कमज़ोर-सा पौधा ही सही,

अपने नाज़ुक फूलों की हिफ़ाज़त के लिए

थोड़ी कोशिश तो कर ही सकता हूँ। 


रविवार, 7 जून 2026

858.अधिकार और कर्तव्य

 


वह चलता जाता था 

काँटों-भरी राह पर नंगे पैर,

कभी तेज़ धूप में,

कभी गहरे अंधेरे में। 


लड़खड़ा जाता था कभी-कभी,

पर मैं उसके कंधों पर 

बेफ़िक्र बैठा रहता था,

जानता था कि वह 

गिरने नहीं देगा मुझे । 


मैंने महसूस नहीं किए 

उसके पाँव के छाले,

उसकी फूलती साँसे,

उसकी दुखती पीठ। 


पहली बार मैंने महसूस किया 

उसका प्रेम, उसका दर्द,

जब कोई बैठ गया आकर 

मेरे कंधों पर। 


वह जो कंधों पर उठाता है,

कर्तव्य समझता है अपना, 

पर जो कंधों पर बैठता है, 

इसे कुछ नहीं समझता 

अपने हक़ के सिवा।