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रविवार, 23 फ़रवरी 2025

वृद्धावस्था पर मेरी 51 हिन्दी कविताओं का संकलन ‘बूढ़ा पेड़’

वृद्धावस्था पर मेरी 51 हिन्दी कविताओं का संकलन ‘बूढ़ा पेड़’ आज से अमेज़न पर उपलब्ध है। मूल्य 49 रुपए है। अगर आपने किंडल अनलिमिटेड का सब्स्क्रिप्शन ले रखा है, तो यह किताब आप मुफ़्त पढ़ सकते हैं। संकलन में परिवार और समाज की सच्चाई झलकती है। ये कविताएं उन करोड़ों बूढ़ों की आपबीती है, जो अपनी संतान के लिए सब कुछ लुटा देते हैं, पर अंत में दुःख ,आर्थिक संकट, अकेलेपन और अनदेखी के शिकार हो जाते हैं।  


जो लोग बूढ़े हो चुके हैं, उन्हें अपनी तस्वीर इन कविताओं में दिखाई देगी। जो अभी बूढ़े नहीं हुए हैं, पर देर-सवेर होंगे, उन्हें अपने भविष्य की झलक इनमें मिलेगी। जो लोग बूढ़ों की ठीक से देखभाल कर रहे हैं और जो बूढ़े अकेलापन और अनदेखी  नहीं झेल रहे हैं, उन्हें इन कविताओं को पढ़कर लगेगा कि वे कितने भाग्यशाली हैं।


https://www.amazon.in/dp/B0CZ5W8S6D





शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2025

796. उँगलियाँ

 


मेरे बालों में धीरे-धीरे 

टहल रही हैं कुछ उँगलियाँ,

अच्छी लगती हैं 

ये जानी-पहचानी उँगलियाँ. 

मैं इनसे कहता हूँ,

ज़रा देर तक टहलो,

अच्छा होता है सेहत के लिए 

लम्बा टहलना. 

++

अब वे उँगलियाँ 

नर्म-नाज़ुक नहीं रहीं,

न ही मेरे बाल घने रहे,

मगर अच्छी लगती हैं,

जब वे घूमती हैं

मेरे कम होते बालों में,

उँगलियों को भी पसंद है,

मेरे बालों में टहलना. 

++

अब नहीं रहीं वे उँगलियाँ,

जो अधिकार से टहला करती थीं

मेरे घने बालों में,

अच्छा ही हुआ 

कि अब वे बाल भी नहीं रहे. 


गुरुवार, 6 फ़रवरी 2025

795. वंदे भारत

 


वंदे भारत,
अच्छा लगता है तुम्हें देखकर,
गर्व होता है तुम्हारी रफ़्तार पर,
अनुपम है तुम्हारी ख़ूबसूरती,
पर कितना अच्छा होता
अगर तुम हमारे स्टेशन पर भी रुकती,
हम भी बैठ पाते कभी
तुम्हारी किसी बोगी में।