पेड़ खड़े हैं क़तार में,
किसी के इंतज़ार में,
शायद आ जाए इस ओर
कोई अजनबी मुसाफ़िर।
सावधान खड़े हैं सब,
देख रहे हैं टकटकी बांधे,
न कहीं बादल, न कहीं बारिश,
आज ख़ुशनुमा है मौसम।
इस सुनसान रास्ते पर
न कंकड़ हैं, न कांटे,
पर कौन जाता है उधर,
कोई नहीं जाता जिधर?
इतना भी डर काहे का,
इतनी भी एहतियात क्यों,
कोई तो करे हिम्मत,
कोई तो समझे
कि ऐसे रास्तों पर चलकर ही
मिला करती है ढंग की मंज़िल।
सुंदर
जवाब देंहटाएंऔर इस रास्ते पर चलकर ही मिलता है खुला आसमान! जिसकी ख्वाहिश सबको है पर घर से निकलना कोई नहीं चाहता
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 29 अगस्त, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंपर कौन जाता है उधर,
जवाब देंहटाएंकोई नहीं जाता जिधर? - Bahut hi sunder line jo sochne par majboor karti hai.