कविताएँ
मंगलवार, 29 सितंबर 2026
870. मालगाड़ी
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मैं मालगाड़ी हूँ, धीरे-धीरे चलती हूँ, हर पैसेंजर, हर एक्सप्रेस को चुपचाप रास्ता देती। मेरी राह में भी आते हैं बहुत सारे स्टेशन, पर किसी को...
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रविवार, 27 सितंबर 2026
869. ठीक से देख लेना गाँव
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वंदे भारत, अबकी बार आना, तो कुछ देर ठहर जाना, हम नहीं चढ़ेंगे तुम्हारे डिब्बों में, ठीक से देख लेना हमारा गाँव, फिर अपने रास्ते चली जाना।
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मंगलवार, 22 सितंबर 2026
868. कभी ऐसे भी आओ
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वंदे भारत की तरह नहीं, कभी पैसेंजर की तरह भी आओ, मेरे छोटे से स्टेशन पर एक दिन के लिए ही सही, थोड़ी देर रुक जाओ।
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सोमवार, 14 सितंबर 2026
867. 15 सितंबर
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हिन्दी आज उदास है, कल ही तो आई थी वह, गाजे-बाजे से स्वागत हुआ था उसका, आज निकाल दी गई घर से। हर साल धोखा खाती है वह, हर साल चली आती है बु...
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बुधवार, 26 अगस्त 2026
866. भूला-भटका रास्ता
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पेड़ खड़े हैं क़तार में, किसी के इंतज़ार में, शायद आ जाए इस ओर कोई अजनबी मुसाफ़िर। सावधान खड़े हैं सब, देख रहे हैं टकटकी बांधे, न कहीं बादल,...
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