कविताएँ
शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026
846. गुलाब
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एक ख़ूबसूरत-सा ख़्वाब देखा मैंने, गुलाब के हाथों में गुलाब देखा मैंने। कहते हैं आँखें उसकी झील सी हैं, गुलाब में झील, झील में गुलाब देखा मैंन...
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बुधवार, 4 फ़रवरी 2026
832. कीचड़ कमल से
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कमल, इतना भी मत इतराओ, मुझमें ही हैं तुम्हारी जड़ें, तुमसे मैं नहीं, मुझसे तुम हो। मैं खिला सकता हूँ तुम जैसे कई कमल, ज़िंदा रह सकता हूँ...
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सोमवार, 19 जनवरी 2026
831. पतंग
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बहुत पतंगें थीं आसमान में, जिनमें से एक हठात कट गई, बड़ी देर से उड़ रही थी, हिचकोले खा रही थी, फिर संभल भी रही थी। लड़ना आता था उसे, मज़बूत थ...
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मंगलवार, 13 जनवरी 2026
830. इस बार का भोगाली बिहू
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इस साल लड्डुओं में मिठास कुछ कम है, भेलाघर* अच्छा है, पर पहले-सा नहीं है। मेजी** की आंच मद्धिम है, चिड़वा थोड़ा कच्चा, दही खट्टा है, गुड़ का ...
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गुरुवार, 8 जनवरी 2026
829. किसे ले गई ट्रेन ?
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कई लोग थे प्लेटफॉर्म पर, एक को चढ़ना था, बाक़ी सब चढ़ाने आए थे। ट्रेन आई, तो वह चढ़ गया, जो चढ़ाने आया था, जिसका कोई इरादा नहीं था यात्रा पर निक...
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