कविताएँ

रविवार, 7 जून 2026

858.अधिकार और कर्तव्य

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  वह चलता जाता था  काँटों-भरी राह पर नंगे पैर, कभी तेज़ धूप में, कभी गहरे अंधेरे में।  लड़खड़ा जाता था कभी-कभी, पर मैं उसके कंधों पर  बेफ़िक्र ब...
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मंगलवार, 26 मई 2026

857. बारिश

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  बांसुरियों, सज जाओ होंठों पर, बजो, पायलों, बंध जाओ पाँवों में, खनको, गीतों,चढ़ जाओ भीगी जीभों पर, गूँजो।  बरस रहा है पानी रिमझिम, तर हो गई ...
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शुक्रवार, 22 मई 2026

856. क़तार के आख़िर में खड़ा आदमी

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  क़तार के आख़िर में खड़ा आदमी  अनंत से अपनी बारी के इंतज़ार में है, वह क़तार के आख़िर में इसलिए है  कि नए-नए लोग आते गए और यह कहकर आगे खड़े होते ग...
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शुक्रवार, 8 मई 2026

855. माँ

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कल मदर्स डे के अवसर पर सभी माँओं के सम्मान में मेरी यह कविता। *** उसने नहीं सीखा हथियार चलाना, नहीं लड़ी कोई लड़ाई, पर वह डटी रहती है  मोर्चे ...
8 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 2 मई 2026

854. सुनो, जीतू मुंडा

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  जीतू मुंडा, मुश्किल रहा होगा तुम्हारे लिए  अपनी बहन को मरते देखना, उसे क़ब्र में लिटाना, उसके शव पर मिट्टी डालना, फिर कोई जंगली फूल चढ़ाना। ...
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