कविताएँ

बुधवार, 26 अगस्त 2026

866. भूला-भटका रास्ता

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  पेड़ खड़े हैं क़तार में, किसी के इंतज़ार में,  शायद आ जाए इस ओर   कोई अजनबी मुसाफ़िर।  सावधान खड़े हैं सब, देख रहे हैं टकटकी बांधे, न कहीं बादल,...
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शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

865. कौवे का इंतज़ार

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      जब कभी कोई कौवा  उसके घर की मुंडेर पर  कांव-कांव करता है, बहुत ख़ुश  हो जाती है  वह अकेली महिला।  बनाने लगती है  अपने बेटे के लिए  बेस...
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शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

864. समुद्र-तट पर मैंने जाना

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  समुद्र-तट पर मैंने देखी  दूर तक फैली हुई रेत, उंगली चलाई, तो देखा, आसानी से चल रही थी।  जल्दी-जल्दी लिखने लगा मैं, तस्वीरें बनाने लगा, अचा...
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शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

863. पाटखोड़ी

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  क्या आपने जूट की लकड़ी देखी है? मेरे यहाँ पाटखोड़ी कहते हैं इसे,  पतली-सी होती है,कमज़ोर सी, पाँव पड़ते ही टूट जाती है, पर जब यह जलती है, तो द...
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गुरुवार, 23 जुलाई 2026

862. जुगनू

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  जब डूब जाता है सूरज, आकाश में नहीं होते चाँद-सितारे, जब नहीं चमकती बिजली, नहीं जलती कोई लालटेन, चुक जाते हैं दीपक के तेल-बाती, जब नहीं भड़क...
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