कविताएँ
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026
852. उसके हिस्से में
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वह खाना अच्छा बनाती थी, उसके हाथों में जादू था, चटखारे लेकर खाते थे घरवाले, तारीफ़ करते थे उसके खाने की। वह खाना इतना अच्छा बनाती थी कि उसक...
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रविवार, 5 अप्रैल 2026
851. आज का युद्ध
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सुनो सीता, अच्छा होता, अगर रावण से युद्ध आज होता, न उतना समय लगता, न उतना कष्ट होता। न कहीं जाने की ज़रूरत होती, न बंदर-भालू इकट्ठा करने क...
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मंगलवार, 31 मार्च 2026
850. वह बच्ची
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एक गोरी-चिट्टी बच्ची, जो युद्ध में मारी गई, ईरानी थी, वह अमेरिका के स्कूल में होती, तो कहना मुश्किल था कि वह अमेरिकी नहीं, ईरानी है।
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रविवार, 29 मार्च 2026
849. युद्ध के दिनों में
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जानता हूँ तुम्हें नौ महीने हो गए गर्भ में, पर छटपटाओ मत, हो सके, तो अंदर ही रहो, बाहर हवा ज़हरीली है, ड्रोन, बम और मिसाइलें तुम्हारे इंत...
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शनिवार, 21 मार्च 2026
848. निश्चय
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रात को बार-बार चौंकती है, झटके से उठ जाती है लड़की, पसीने से लथपथ हो जाती है, डरकर सहम जाती है लड़की। पानी के घूंट हलक से उतारती है, उठकर ...
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