कविताएँ

गुरुवार, 8 जनवरी 2026

829. किसे ले गई ट्रेन ?

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कई लोग थे प्लेटफॉर्म पर, एक को चढ़ना था, बाक़ी सब चढ़ाने आए थे। ट्रेन आई, तो वह चढ़ गया, जो चढ़ाने आया था, जिसका कोई इरादा नहीं था यात्रा पर निक...
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मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

828. वह कमरा

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  इन दिनों अजीब सा लगता है वह कमरा।   आवाज़ें आती हैं उससे , पर ग़ायब है वह जानी-पहचानी बुलंद-सी आवाज़ , हँसता है कोई उसमें कभी-कभी , ...
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बुधवार, 10 दिसंबर 2025

827. वह थी

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  वह जब थी, तो पता ही नहीं था  कि वह थी।  वह बताती भी थी, तो कोई समझता नहीं था  कि वह थी।  अब जब वह नहीं है, तो पता चला है  कि वह थी, पर उसे...
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मंगलवार, 2 दिसंबर 2025

826. एक ग़ज़ल

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  क़लम नहीं रही अब भरोसे के लायक़, बीच ग़ज़ल स्याही जम सी गई है। मै भी नहीं पहले सा, वह भी नहीं पहले सी, दूरियाँ मगर कुछ कम सी गई हैं। मिली थी म...
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गुरुवार, 27 नवंबर 2025

825.रिश्तों की वारंटी

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  नया रिश्ता ऑर्डर करो, तो ध्यान से करना, अच्छी तरह ठोक-बजाकर सोच-समझकर करना।   मार्केटिंग से सावधान रहना, पैकिंग पर मत जाना, थोड़ा भी शक़ हो,...
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