कविताएँ

शनिवार, 13 जून 2026

859. कोशिश

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  बहुत कोशिशों से मैंने  कांटे उगाए हैं खुद में, पर इसका मतलब यह नहीं  कि अब फूल नहीं खिलते मुझमें।  मेरे पास आओगे, तो काँटों का सामना करना ...
रविवार, 7 जून 2026

858.अधिकार और कर्तव्य

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  वह चलता जाता था  काँटों-भरी राह पर नंगे पैर, कभी तेज़ धूप में, कभी गहरे अंधेरे में।  लड़खड़ा जाता था कभी-कभी, पर मैं उसके कंधों पर  बेफ़िक्र ब...
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मंगलवार, 26 मई 2026

857. बारिश

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  बांसुरियों, सज जाओ होंठों पर, बजो, पायलों, बंध जाओ पाँवों में, खनको, गीतों,चढ़ जाओ भीगी जीभों पर, गूँजो।  बरस रहा है पानी रिमझिम, तर हो गई ...
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शुक्रवार, 22 मई 2026

856. क़तार के आख़िर में खड़ा आदमी

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  क़तार के आख़िर में खड़ा आदमी  अनंत से अपनी बारी के इंतज़ार में है, वह क़तार के आख़िर में इसलिए है  कि नए-नए लोग आते गए और यह कहकर आगे खड़े होते ग...
4 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 8 मई 2026

855. माँ

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कल मदर्स डे के अवसर पर सभी माँओं के सम्मान में मेरी यह कविता। *** उसने नहीं सीखा हथियार चलाना, नहीं लड़ी कोई लड़ाई, पर वह डटी रहती है  मोर्चे ...
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