कविताएँ
गुरुवार, 27 नवंबर 2025
825.रिश्तों की वारंटी
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नया रिश्ता ऑर्डर करो, तो ध्यान से करना, अच्छी तरह ठोक-बजाकर सोच-समझकर करना। मार्केटिंग से सावधान रहना, पैकिंग पर मत जाना, थोड़ा भी शक़ हो,...
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मंगलवार, 4 नवंबर 2025
824. स्कूटर भाई
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स्कूटर भाई, अब चलते हैं, किसी कबाड़ी के यहां रहते है, तुम भी पुराने, मैं भी पुराना, बीत चुका है हमारा ज़माना। यूं उदास मत होना, जो नए हैं...
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गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025
823. दिवाली के बाद
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1. दिवाली के बाद सड़कों पर यूं बिखरा था पटाखों का मलबा, जैसे काम निकल जाने के बाद सही चेहरा दिखे किसी का। 2. पटाखों का मलबा देखा, तो मैंने सो...
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शनिवार, 18 अक्टूबर 2025
822. दिवाली पर कुछ हास्य कविताएं
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मैं आम तौर से हास्य कविताएं नहीं लिखता, पर इस दिवाली में ऐसी कुछ छोटी-छोटी कविताएं लिखी गईं। मैं इस अनुरोध के साथ साझा कर रहा हूँ कि इन्हें ...
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सोमवार, 13 अक्टूबर 2025
821. कीचड़ और कमल
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मैं जिससे निकला हूँ, असहज हूँ उससे, कहाँ मैं कमल, कहाँ वह कीचड़, मैं ख़ुशबू से सराबोर, वह बदबूदार। कोई मेल नहीं मेरा और उसका, उसके ...
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