कविताएँ
मंगलवार, 1 अप्रैल 2025
801. फ़र्स्ट अप्रैल
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मूर्ख बनाने का भी कोई दिन होता है क्या, हम तो हमेशा ही बनाते रहते हैं, शुरुआत में प्रयोजन से बनाते थे, अब तो आदत हो गई है बनाने की। कित...
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शुक्रवार, 28 मार्च 2025
800. ट्रेन में चढ़ने की कोशिश में औरत
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वह हमेशा समय पर पहुंची स्टेशन, पर चढ़ नहीं पाई किसी डिब्बे में, उसे ठेल दिया हमेशा चढ़नेवालों या उतरनेवालों ने, प्लेटफ़ॉर्म पर ही छूटती रह...
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बुधवार, 19 मार्च 2025
799. बूढ़ी सड़क
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वृद्धावस्था पर मेरी 51 हिन्दी कविताओं का संकलन ‘बूढ़ा पेड़’ अमेज़न पर उपलब्ध है। संकलन की एक कविता का मैंने अंग्रेज़ी में अनुवाद किया है। पढ़िए,...
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मंगलवार, 11 मार्च 2025
798. होली की आहट
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समय से पहले कूकने लगी है कोयल, बहने लगी है पछुआ हवा, बौर आ गए हैं आम पर, सबको इंतज़ार है इस होली में तुम्हारे गाँव आने का। ++ तुम होली न...
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रविवार, 2 मार्च 2025
797. चलो, एक कविता लिखते हैं
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चलो, आज एक कविता लिखते हैं, थोड़ा तुम लिखो, थोड़ा मैं लिखूँ, अलग-अलग नहीं, साथ मिलकर एक अधूरा काम पूरा करते हैं। न तुम अपना कष्ट लिखो, न...
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