कविताएँ
शनिवार, 30 अक्टूबर 2021
६१५. इंसान
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इंसान हो,तो साबित करो, कहने से क्या होता है? दूसरों के दुःख से दुखी होकर दिखाओ, दूसरों के आँसुओं से पिघलकर दिखाओ. दूसरों की कामयाबी पर ...
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रविवार, 24 अक्टूबर 2021
६१४.भगवान बचाए
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तय किया है उन्होंने कि जनसेवा करेंगे, संकल्प से उनके भगवान बचाए. वे करते कम हैं, गिनाते ज़्यादा हैं, मेहरबानियों से उनकी भगवान बचाए. वे भ...
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गुरुवार, 21 अक्टूबर 2021
६१३. गुल्लक
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एक गुल्लक है, जिसमें सालों से मैं पैसे डाल रहा हूँ, मैंने इसे कभी तोड़ा नहीं, शायद कभी तोड़ूंगा भी नहीं, पर जब मैं गुल्लक को हिलाता हूँ और स...
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मंगलवार, 19 अक्टूबर 2021
६१२.सपने
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आजकल परेशान हूँ मैं, नींद नहीं आती मुझे, इधर से उधर करवटें बदलते पूरी रात गुज़र जाती है, सपने देखे तो जैसे मुझे एक अरसा हो गया. मुसीबत म...
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रविवार, 17 अक्टूबर 2021
६११. मृत्यु
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थोड़ी देर के लिए वह कहीं चला क्या गया, लौटकर आया तो देखा, उसका शरीर ग़ायब था, फूँक दिया गया था उसे, राख बन चुका था वह. अब उसके पास कोई चारा ...
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