श्मशान के सामने,
जलने को बेताब हैं वे,
परेशान हैं,
नहीं जानते थे
कि अस्पताल से निकलकर भी
क़तारों का सिलसिला ख़त्म नहीं होगा.
ज़िंदा होते,
तो धक्का-मुक्की करते,
आगे निकल जाते,
पर अब तो कोई चारा नहीं है.
शव चिंता में हैं
कि चिता तक पहुँचने में
ज़्यादा देर हुई,
तो वे भी न भाग जाएँ,
जो मुश्किल से साथ आए हैं.
सादर नमस्कार,
जवाब देंहटाएंआपकी प्रविष्टि् की चर्चा रविवार ( 02-05-2021) को
"कोरोना से खुद बचो, और बचाओ देश।" (चर्चा अंक- 4054) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
धन्यवाद.
…
"मीना भारद्वाज"
सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंभयावह स्थिति है ।।शव चिंता में हैं कि साथ आये जो दो चार लोग हैं वो भी न भाग जाएँ । कटु सत्य कहती रचना ।
जवाब देंहटाएंमार्मिक रचना
जवाब देंहटाएंमर्मस्पर्शी सृजन ।
जवाब देंहटाएंआज की सच्चाई बयां करती बहुत ही मार्मिक रचना ।
जवाब देंहटाएंमर्म को छूती है रचना ...
जवाब देंहटाएंगहरा अर्थ समेटे ...