गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

४३०.परिंदों से

'राग दिल्ली' में प्रकाशित मेरी कविता:

परिंदों!
मत इतराओ इतना
और भ्रम में मत रहना
कि यह दुनिया अब
हमेशा के लिए तुम्हारी हुई!

मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

४२९. लॉकडाउन

Lockdown, Stay At Home, Stay Home

वार्डरॉब उदास हैं,
पोशाकें परेशान हैं,
कोई नहीं ले रहा 
उनकी सुध,
कोई नहीं पूछ रहा 
आईने से
कि कौन सी ड्रेस 
फबेगी उस पर.

गहने बंद हैं 
पिटारियों में,
हसरत से देख रहे हैं 
गृहिणियों को,
मेकअप का सामान 
घुट रहा है 
डिबियों-बोतलों में.

बीमार कर रखा है 
सबको कोरोना ने,
सबको इंतज़ार है 
लॉकडाउन टूटने का.

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

४२८. लॉकडाउन में

Sunset, Tree, Dusk, Dawn, Red, Glow

अच्छा है,ख़ुद से मुलाक़ात हो जाती है,
चिड़ियों से बात हो जाती है,
फूलों के रंग देख लेते हैं,
सूरज का डूबना देख लेते हैं.

पर याद आते हैं लोगों के रेले,
हाट में लगे सब्जियों के ठेले,
एक दूजे से टकराकर निकलना,
खोमचों पर खाने के लिए मचलना.

अच्छा है, घरवालों के साथ रहते हैं,
बहुत कुछ कहते,बहुत कुछ सुनते हैं,
पर याद आता है,पार्टियों के लिए सजना
और घर की कॉल बेल का अचानक से बजना.

बुधवार, 22 अप्रैल 2020

४२७. चूहे

Mouse, Rodent, Rat, Mice, Pest, Mouse
एक चूहा बिल से निकला,
थोड़ी देर घर में घूमा,
फिर वापस बिल में घुस गया.
उसने दूसरे चूहों से कहा,
'अभी कुछ दिन बिल में रहो,
हमारे फ्लैट पर 
दूसरे चूहों ने कब्ज़ा कर लिया है,
इंतज़ार करो उनके जाने का,
जल्दी ही यह फ्लैट 
फिर से हमारा होगा.'

मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

४२६. पिंजरे में

'राग दिल्ली' में लॉकडाउन की स्थिति पर मेरी कविता  'पिंजरे में'   यहाँ पढ़ी जा सकती है.

https://www.raagdelhi.com/sparrow/

शनिवार, 18 अप्रैल 2020

४२५. घर में हो तो

Bridge, Wooden Bridge, Color, The Fog

अब जब घर में हो,
तो बनाओ कुछ नए पुल,
मरम्मत करो उन पुराने पुलों की,
जिनमें दरारें आ गई हैं,
जो टूटने की कगार पर हैं.
***
अब जब घर में हो,
तो ध्यान से देखना,
वे काम कैसे पूरे होते हैं,
जिनके बारे में तुम सोचते थे 
कि अपने आप हो जाते हैं.
***
अब जब घर में हो,
तो अपने अन्दर देखना,
तुम हैरान रह जाओगे,
जब वहां तुम्हारी मुलाकात 
एक अजनबी से होगी.

मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

४२४. सफ़ाई


House, Home, Icon, Symbol, Sign

चलो, आज घर में हैं,
तो थोड़ी सफ़ाई करते हैं.

तोड़ देते हैं
अहम के जाले,
बुहार देते हैं
ग़लतफ़हमियों की धूल,
डाल देते हैं मशीन में
रिश्तों की चादरें,
उतार देते हैं 
उन पर जमी  मैल.

शिकायतों का कचरा,
जो भरा पड़ा है
अलमारियों-दराज़ों में,
ढूंढ कर निकालते हैं उसे,
फेंक आते हैं कूड़ेदान में.

एक बाल्टी लेते हैं,
डालते हैं ढक्कन-भर
प्यार का फिनायल
और लगा देते हैं पोंछा 
समूचे घर में.

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

४२३. परिंदों की दुनिया

Bird, Western Yellow Wagtail

परिंदों,
निकल जाओ घोंसलों से,
बेख़ौफ़ घूमो,
चंद दिनों के लिए 
हमने छुट्टी ले ली है,
फ़िलहाल यह दुनिया,
जो तुम्हारी भी है,
तुम्हारे हवाले की है.

शनिवार, 11 अप्रैल 2020

४२२. अब जब घर में हो

Monkey, Mirror, Stare, Thinking, Monkey

अब जब घर में हो,
तो कभी आईना देख लेना,
फिर सच-सच बताना,
क्या तुम वही हो,
जो तुम सोचते हो 
कि तुम हो.
***
अब जब घर में हो,
तो उनकी भी सुध लो,
जो सालों से घर में हैं,
पर बेघर हैं.
***
अब जब घर में हो,
तो थोड़ा शांत बैठो,
बहुत भाग चुके ,
इतना कि भागते-भागते तुम
ख़ुद से आगे निकल गए हो.
***
अब जब घर में हो,
तो गिनो, 
तुम्हारे आस-पास कितनी खाइयाँ हैं,
सबको पाटने के लिए तुम्हें 
कितना लम्बा लॉकडाउन चाहिए?

गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

४२१. पंछियों से

Dawn, Sunrise, Early Morning, Skies

पंछियों, इतना मत इतराओ,
किसी भ्रम में न रहो,
हम अभी यहीं हैं,
इसी दुनिया में,
बस चंद रोज़ और,
हम लौट कर आएंगे, 
तुम्हें वापस जाना होगा,
हमारी दुनिया में तुम्हारे लिए 
कहीं कोई जगह नहीं है.

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

४१९. दिया और हवाएँ

Lamp, Earthen, Oil Lamp, Flame, Light
अपनी बालकनी में मैंने 
उम्मीद का एक दिया जलाया,
क्रूर हवाएँ रातभर चलती रहीं,
दिए की लौ लड़खड़ाती रही,
लगा अब बुझी,अब बुझी.

सुबह उठकर मैंने देखा,
दिया जल रहा था बिना तेल के,
बाती का आख़िरी छोर थामे था लौ को,
हवाएँ ख़ामोश थीं,
दूर आकाश में सूरज निकल रहा था.

शनिवार, 4 अप्रैल 2020

४१८. जुगनू

न मेरे पास दिया है,
न तेल, न बाती,
दिवाली की बची 
कोई मोमबत्ती भी नहीं है,
न ही कोई फ़्लैश लाइट है 
मेरे पुराने मोबाइल में.

फिर भी मैं खड़ा हो जाऊंगा 
घर की देहरी पर,
फैला दूंगा हथेलियाँ,
आ बैठेगा उनमें 
कोई-न-कोई जुगनू 
जब बंद हो जाएंगे बल्ब,
जब नहीं जल रही होगी 
कहीं कोई ट्यूबलाइट.

गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

४१७. माँ

Hand, Human, Woman, Adult, Hands

अरसे बाद सब घर में हैं,
मुस्कराती रहती है माँ,
सबको लगता है,
बिल्कुल ठीक है वह,
सबको लगता है,
बीमार नहीं है माँ,
अभी कुछ नहीं होगा माँ को.

**

चल-फिर नहीं सकती थी माँ,
बिस्तर में ही रहती थी,
अब सब घर में हैं,
तो थोड़ा चलने लगी है वह,
सब हैरत में हैं
कि बिना घुटना बदलवाए
कैसे ठीक होने लगी है माँ?