शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2020

४९२. तूफ़ान में दूब



उस दिन तेज़ तूफ़ान आया,

ज़ोर की आंधियां चलीं,

धुआंधार बारिश हुई,

धराशाई हो गए विशालकाय पेड़,

टेढ़े-मेढ़े हो गए बिजली के खम्भे.

गिर गईं बहुत-सी झोपड़ियाँ,

ढह गए कच्चे मकान,

पक्के मकानों ने भी सहा 

ख़ूब सारा नुकसान.


इस भीषण तबाही में भी 

बच गई सही-सलामत 

धरती की गोद में छिपी 

नन्ही, कमज़ोर-सी दूब.

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (18-10-2020) को     "शारदेय नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएँ"  (चर्चा अंक-3858)     पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --   

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  2. यही तो जीवन की सीख है. बहुत सुन्दर रचना.

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  3. अत्यंत सुन्दर और प्रेरक रचना ।

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  4. इस भीषण तबाही में भी

    बच गई सही-सलामत

    धरती की गोद में छिपी

    नन्ही, कमज़ोर-सी दूब.


    वाह!!!
    प्रेरक

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