कविताएँ
शनिवार, 20 जून 2026
860. ऐसे पढ़ो मुझे
›
मैं गीता हूँ, बाइबल हूँ, क़ुरान हूँ। मुझे पढ़ो, मगर वैसे नहीं, जैसे पढ़ा गया है अब तक। मुझे थोड़ा पढ़ो, ज़्यादा समझो, मुझे अनपढ़ों की तरह पढ़ो, ...
8 टिप्पणियां:
शनिवार, 13 जून 2026
859. कोशिश
›
बहुत कोशिशों से मैंने कांटे उगाए हैं खुद में, पर इसका मतलब यह नहीं कि अब फूल नहीं खिलते मुझमें। मेरे पास आओगे, तो काँटों का सामना करना ...
2 टिप्पणियां:
रविवार, 7 जून 2026
858.अधिकार और कर्तव्य
›
वह चलता जाता था काँटों-भरी राह पर नंगे पैर, कभी तेज़ धूप में, कभी गहरे अंधेरे में। लड़खड़ा जाता था कभी-कभी, पर मैं उसके कंधों पर बेफ़िक्र ब...
7 टिप्पणियां:
मंगलवार, 26 मई 2026
857. बारिश
›
बांसुरियों, सज जाओ होंठों पर, बजो, पायलों, बंध जाओ पाँवों में, खनको, गीतों,चढ़ जाओ भीगी जीभों पर, गूँजो। बरस रहा है पानी रिमझिम, तर हो गई ...
10 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 22 मई 2026
856. क़तार के आख़िर में खड़ा आदमी
›
क़तार के आख़िर में खड़ा आदमी अनंत से अपनी बारी के इंतज़ार में है, वह क़तार के आख़िर में इसलिए है कि नए-नए लोग आते गए और यह कहकर आगे खड़े होते ग...
6 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें