कविताएँ
शुक्रवार, 31 मार्च 2023
७०६. क्या था,जो नहीं है
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अब भी हम वैसे ही मिलते हैं, जैसे पहले मिला करते थे, वैसी ही बातें करते हैं, जैसी पहले किया करते थे. बातों में वही शब्द, होठों पर वही मुस्...
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शुक्रवार, 24 मार्च 2023
७०५.ज़िद
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हम एक ही रास्ते पर चले, एक ही मंज़िल की ओर बढ़े, पर साथ-साथ नहीं, कोई वजह नहीं थी, बस एक झिझक थी, एक ज़िद थी कि हम अकेले भी चल सकते हैं. कभ...
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रविवार, 19 मार्च 2023
७०४. घुटनों का दर्द
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पिता, बहुत परेशान रहता था मैं अपने घुटनों के दर्द से, पर जब से पता चला है कि ऐसा ही दर्द तुम्हें भी होता था, मुझे अच्छा लगने लगा है अपन...
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शनिवार, 11 मार्च 2023
७०३. कविता
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मीटिंग के बीच में अचानक मेरे दिमाग़ में एक कविता कौंध गई, कविता ने कहा, सब कुछ छोड़ो, पहले मुझे लिखो, मीटिंग तो बाद में भी हो जाएगी, पर म...
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मंगलवार, 7 मार्च 2023
७०२. गुब्बारे
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उसने होली में मुझ पर गुब्बारा कुछ ऐसे फेंका कि उसका निशाना लग भी गया और नहीं भी. ** वह जो खिड़की के पीछे से गुब्बारे फेंकती है, डरती भी है...
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