बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

871. सीमाएं

 



जो मैंने सोचा था,

वह मैं कर नहीं पाया,

जो मैं कर पाया,

वह मैंने सोचा नहीं था। 


जो मैं कर पाया,

वह बहुत अच्छा था,

पर जो मैं कर नहीं पाया,

उसको न  कर पाने की कसक 

हमेशा मेरे साथ रहती है। 


अब मैं न वह कर पाता हूँ, 

जो मैंने सोचा है,

न वह, जो मैं कर सकता हूँ,

पर जो मैंने सोचा नहीं है।