शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

861.दृष्टि

 



जितना झुक सकता था,

उससे ज़्यादा झुक गया हूँ मैं, 

जीने के लिए अब उठना, 

खड़ा होना ज़रूरी है। 


और मत झुकाओ मुझे,

ज़रा सीधा होने दो,

इतना झुक चुका हूँ मैं 

कि मुझे साफ़-साफ़ दिखने लगा है 

अपना ज़रूरत से ज़्यादा झुकना,

तुम्हारा ज़रूरत से ज़्यादा तनना। 



7 टिप्‍पणियां:

  1. जब साफ़-साफ़ दिखने लगे तब से ही उठना, सीधा खड़े होना शुरू हो जाता है

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह , सही अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं